भारत का भविष्य घुसपैठियों से नहीं, बल्कि देश के नौजवानों और वास्तविक मतदाताओं के जनादेश से तय होगा: जेपी नड्डा

New Delhi, 27 अक्टूबर . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने Tuesday को Gujarat के Ahmedabad में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा को संबोधित किया और कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष देती है, जबकि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सत्यापन किया गया. जेपी नड्डा ने आपातकाल, निर्वाचित Governmentों को बर्खास्त करने और न्यायपालिका में हस्तक्षेप के उदाहरण देते हुए कांग्रेस के लोकतंत्र संबंधी दावों पर सवाल उठाए.
Union Minister ने घुसपैठियों को मतदाता सूची से हटाने तथा Prime Minister मोदी के नेतृत्व में लोकतंत्र मजबूत करने का आह्वान किया. कार्यक्रम के दौरान Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल, उपChief Minister हर्ष सांघवी सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे.
जेपी नड्डा ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में आह्वान किया है. इसके तहत देश के विभिन्न स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी और देश की जनता बड़ी-बड़ी रैलियां कर रही है. यहां भी रैली में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर स्पष्ट है कि जहां तक नजर जाती है, वहां तक लोग ही लोग दिखाई देते हैं. देशभर में ऐसी रैलियां बड़ी संख्या में हो रही हैं. भाजपा का नारा है, ‘लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ’.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और इंडी गठबंधन लोकतंत्र के साथ जिस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं और प्रजातंत्र का मजाक बनाने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी इस कुत्सित कोशिश और देश में अराजकता फैलाने की मानसिकता को हमें चूर-चूर करना है और इसका मुंहतोड़ जवाब देना है. आज Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में दुनिया में India की थाती बोल रही है.
नड्डा ने आगे कहा कि दुनिया के लोगों ने माना और समझा है कि यदि कहीं प्रजातंत्र सही मायने में जीवित है और दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश कोई है, तो वह India है. हमारे चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं ने पिछले दशकों में जिस गरिमापूर्ण तरीके से काम किया है, उससे दुनिया के सामने यह साबित हुआ है कि भारतीय चुनाव आयोग की अपनी एक प्रतिष्ठा है और दुनिया उसे एक उदाहरण के रूप में देखती है.
Union Minister ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता प्रतिपक्ष एक अबोध बालक की तरह व्यवहार करते हैं. जिस तरह स्कूल का कोई बच्चा गलती से पास हो जाता है, तो कहता है कि वह बहुत होशियार है, लेकिन फेल होने पर मास्टर को खराब बताता है, उसी तरह इंडी अलायंस भी व्यवहार करता है. जब वह गलती से चुनाव जीत जाता है, तो कहता है कि उसे जनता का आशीर्वाद मिला है, लेकिन चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को दोषी ठहराता है.
उन्होंने आगे कहा कि 2024 के चुनाव में Gujarat के गिर के जंगलों में 10 किलोमीटर अंदर महंत हरिदास उदासीन का एक वोट था. उस एक वोट के लिए चुनाव आयोग के 10 कर्मचारी पैदल चलकर 10 किलोमीटर दूर जंगल में गए और वहां बूथ लगाकर महंत हरिदास उदासीन का वोट दर्ज किया. यही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है. चुनाव आयोग लगभग 96 करोड़ लोगों के वोटों को अपने बैलेट पेपर और ईवीएम में दर्ज करता है. यही India का प्रजातंत्र है. हम सभी ने प्रजातंत्र की कीमत को समझा है. India की जनता ने चुनाव आयोग की ताकत को पहचाना है. लोकतंत्र की बात करने वालों को आखिर लोकतंत्र की वास्तविक अहमियत के बारे में पता नहीं है.
नड्डा ने कहा कि आज से 50 साल पहले लोकतंत्र कहां था, जब कांग्रेस ने इमरजेंसी के दौरान बिना किसी कारण 1,30,000 लोगों को मीसा और डीआईआर के तहत दो साल के लिए कैद कर दिया था? क्या यही लोकतंत्र है? आज कांग्रेस को लोकतंत्र याद आ रहा है. ‘India छोड़ो आंदोलन’ (क्विट इंडिया मूवमेंट) के दौरान ब्रिटिश Government ने स्वतंत्रता आंदोलन में जितने लोगों को गिरफ्तार नहीं किया था, उससे अधिक 1,30,000 लोगों को इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान बिना किसी कारण और बिना मुकदमे के जेल में डाल दिया तथा दो साल तक कैद में रखा. इसके बावजूद कांग्रेस आज लोकतंत्र की बात करती है.
उन्होंने कहा कि देश में एसआईआर की प्रक्रिया हवा में नहीं हुई है. इसमें 10,24,000 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर गए. इसके साथ ही इंडी अलायंस के बीएलए सहित लगभग 12,62,000 बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने बीएलओ के काम पर नजर रखी और उनके साथ गांव-गांव तथा घर-घर गए. इसके बाद एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हुई. इस प्रक्रिया में लगभग 95 करोड़ मतदाताओं की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया. जबकि विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि 13 करोड़ वोट काट दिए गए हैं.
जेपी नड्डा ने कहा कि वर्ष 2010 में मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत चुनाव रिटर्निंग ऑफिसर को वोट काटने का अधिकार नहीं था. वर्ष 2010-11 से लेकर 2024 तक कोई वोट नहीं काटे गए थे. ऐसे में अब 13 करोड़ वोट कैसे कट गए? इसमें लगभग 3 करोड़ मतदाता अपने पते पर नहीं मिले, यानी अनुपस्थित थे. लगभग 6.3 करोड़ मतदाता दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए थे. लगभग 1 करोड़ डुप्लीकेट वोट थे, जिनमें लोगों ने एक ही नाम से यहां और अपने गांव में भी वोट बनवा रखे थे.
इसके अलावा, लगभग 2 करोड़ 80 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी. इस तरह कुल 13 करोड़ वोटों की पहचान हुई. एसआईआर ने यही काम किया है. एसआईआर पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि 12 बार हो चुका है. इनमें 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में और दो बार भाजपा के शासनकाल में हुआ. एक बार पूर्व Prime Minister अटल बिहारी वाजपेयी के समय और दूसरी बार Prime Minister मोदी के कार्यकाल में एसआईआर हुआ. वर्ष 2002 में पश्चिम बंगाल में 4 करोड़ 58 लाख मतदाता थे, जिनकी संख्या बढ़कर 7 करोड़ 66 लाख हो गई. देश के 10 निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
बांग्लादेश की सीमा से लगे नौ जिलों में मतदाताओं की संख्या 70 से 100 प्रतिशत तक बढ़ी है. मालदा में 94.58 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 87 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 83 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 82.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. मतदाताओं की संख्या में यह असामान्य वृद्धि अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने के कारण हुई. इंडी अलायंस घुसपैठियों के सहारे देश चलाना चाहता है और उनके वोटों के आधार पर Government बनाना चाहता है. एसआईआर के दौरान किसी का वोट मनमाने ढंग से नहीं काटा गया, बल्कि लोगों से पूछा गया कि वर्ष 2002 में उनके माता-पिता ने कहां वोट दिया था. यदि किसी के माता-पिता बांग्लादेश में थे, तो वह यहां कैसे आ गया?
Union Minister ने कहा कि बिहार में मतदाताओं की संख्या लगभग 7.89 करोड़ से घटकर 7.42 करोड़ रह गई. मतदाताओं की संख्या घटने के बावजूद बिहार में मतदान का प्रतिशत 66 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो आजादी के बाद पहली बार हुआ. बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की. बांग्लादेश से बंगाल और बंगाल से बिहार के रास्ते घुसपैठिए बिहार में मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा रहे थे. मुर्शिदाबाद में आधार कार्ड बनाने की फैक्ट्री जैसी स्थिति बन गई थी. मुर्शिदाबाद के आधार कार्ड के जरिए लोग Haryana और दिल्ली में काम कर रहे थे.
एसआईआर के माध्यम से इन घुसपैठियों को बाहर करने का काम किया गया. राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा में लगभग एक लाख वोट गलत होने का दावा किया था. चुनाव आयोग ने उनसे शपथपत्र देकर शिकायत करने को कहा, ताकि वह मामले की पहचान और जांच कर सके. लेकिन आज तक राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग के पास जाकर कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई. क्या इस तरह देश चलता है? क्या कनॉट प्लेस में एक हजार लोगों को इकट्ठा करके कोई देश को गिरवी रख सकता है? जितने लोग कनॉट प्लेस में इकट्ठा हो रहे हैं, उससे कहीं अधिक संख्या में भारतीय जनता पार्टी देशभर में हजारों स्थानों पर लाखों लोगों को एकत्र करती है.
नड्डा ने कहा कि विपक्ष की राजनीति का तरीका यह है कि जब कोई न्यायिक फैसला उसके खिलाफ आता है, तो वह न्यायाधीशों को धमकाता है और उनके खिलाफ महाभियोग लाने की बात करता है. विपक्ष इसी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने और उसका हनन करने की कोशिश करता है. ऐसे लोग आज लोकतंत्र की बात कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत 100 बार चुनी हुई Governmentों को गिराया है. इनमें से 50 बार इंदिरा गांधी ने खुद चुनी हुई Governmentों को गिराया था.
न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया था. इसके बाद इंदिरा गांधी ने न्यायपालिका के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए नया कानून बनाया और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया. ऐसा करने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र की बात कैसे कर सकती है? जब कांग्रेस पार्टी 2जी और कोयला घोटालों में घिरी, तो उसने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट और सीएजी के अधिकारियों को धमकाना शुरू कर दिया.
पूर्व Prime Minister राजीव गांधी ने योजना आयोग को ‘मसखरों का समूह’ कहा था, जबकि उस समय डॉ. मनमोहन सिंह योजना आयोग के अध्यक्ष थे. इस तरह कांग्रेस ने संविधान की मर्यादाओं को तार-तार किया और आज वही पार्टी संविधान की बात करती है. कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को Prime Minister कार्यालय के बराबर का दर्जा देकर खड़ा किया और भारतीय संविधान को गिरवी रखने का काम किया.
जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि मनमोहन सिंह की Government द्वारा पारित अध्यादेश को राहुल गांधी ने खुलेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़कर फेंक दिया था. कांग्रेस इसी तरह Government चलाती रही है और आज चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रही है. जो कांग्रेस पहले चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पक्ष में करने के लिए रेवड़ियां बांटती थी, वही आज चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठा रही है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर सीट से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने आए थे.
कांग्रेस ने एम. एस. गिल को राज्यसभा में लाकर खेल मंत्री बनाया. अशोक गहलोत ने नवीन चावला को Rajasthan में शिक्षा ट्रस्ट के लिए छह एकड़ जमीन दी थी. चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को बर्दवान विश्वविद्यालय का कुलपति, के. वी. के. सुंदरम को गृह मंत्री का सलाहकार और नागेंद्र सिंह को संयुक्त राष्ट्र महासभा में India का प्रतिनिधि बनाया गया. इसी तरह, वी. एस. रमादेवी को Himachal Pradesh और कर्नाटक का Governor बनाया गया.
कांग्रेस ने इन नियुक्तियों के जरिए चुनाव आयोग को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया. Prime Minister मोदी ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पहली बार Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष को भी भागीदार बनाया.
Union Minister ने कहा कि कांग्रेस जहां भी सत्ता से बाहर होती है, वहां लंबे समय तक सत्ता में वापस नहीं आ पाती. आज कांग्रेस हताश है. कांग्रेस अमरबेल की तरह दूसरों के सहारे ऊपर चढ़ने का प्रयास करती है और जिस पेड़ का सहारा लेती है, उसे भी सुखा देती है. कांग्रेस तमिलनाडु में 58 साल, पश्चिम बंगाल में 48 साल, Gujarat और बिहार में 35 साल तथा उत्तर प्रदेश में भी 35 साल से सत्ता से बाहर है. Jharkhand में कांग्रेस कभी अपने दम पर Government नहीं बना पाई. Odisha में 25 साल और दिल्ली में 12 साल से कांग्रेस सत्ता में नहीं आई है.
केंद्र Government से भी कांग्रेस 12 साल से बाहर है और Prime Minister मोदी के नेतृत्व में Government चल रही है. कांग्रेस को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए कि जनता ने उसे इतने लंबे समय तक सत्ता से बाहर क्यों रखा है. विद्यार्थियों को अपनी असफलता के लिए शिक्षक को दोष देने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. इसी तरह कांग्रेस को भी चुनाव आयोग और दूसरों को दोष देने के बजाय जनता की सेवा पर ध्यान देना चाहिए.
नड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आज सारी हदें पार कर दी हैं. वह बैलेट पेपर से चुनाव नहीं जीत सकती. कभी ईवीएम को लेकर बहाने बनाती है, तो कभी बैलेट पेपर की मांग करती है. चुनाव जीतने में असमर्थ कांग्रेस अब ‘रिजीम चेंज’ की बात कर रही है. जंतर-मंतर पर लोगों को इकट्ठा करने, कनॉट प्लेस में जमावड़ा लगाने या रामलीला मैदान में रैली करने से चुनाव नहीं जीते जाते. चुनाव तब जीते जाते हैं, जब 140 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद मिलता है.
यह आशीर्वाद Prime Minister मोदी को प्राप्त है और इस बात को सभी को ध्यान में रखना चाहिए. Prime Minister मोदी केवल India में ही लोकप्रिय नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया में उनकी लोकप्रियता है. दुनिया आज उनकी प्रतिष्ठा को स्वीकार कर रही है. दुनिया में ओबामा के बाद ट्रंप जैसे नेता आए, लेकिन Prime Minister मोदी लगातार चुनाव जीतकर आगे बढ़ रहे हैं. राहुल गांधी आज ही सुन लें कि वर्ष 2029 में भी Prime Minister मोदी के नेतृत्व में Government बनेगी. कांग्रेस बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया के उदाहरण देती है, लेकिन उसे समझना चाहिए कि India 140 करोड़ लोगों का देश और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. India में न तो बांग्लादेश जैसी स्थिति होगी और न ही अल्बानिया जैसी. यहां जनता की आवाज सुनी जाती है और जनमत का सम्मान किया जाता है.
जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज इतनी हताश हो गई है कि उसने अपनी सारी मर्यादाएं पार कर दी हैं. कांग्रेस ने Prime Minister मोदी के खिलाफ बयान दिया, लेकिन हर बार India की जनता ने अपने जनादेश से कांग्रेस को मुंहतोड़ जवाब दिया और Narendra Modi को Prime Minister बनाया. कांग्रेस को जनता के इस फैसले से सबक लेना चाहिए. हमें यह कहते हुए बहुत दुख होता है कि कांग्रेस का Political दिवालियापन सामने आ चुका है. तीन दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने Prime Minister मोदी के स्वर्गीय पिता के बारे में जिस तरह की टिप्पणी की, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. क्या कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए? कांग्रेस का सबसे बड़ा नेता जब इस तरह की भाषा बोलता है, तो यह उसकी Political स्थिति को दर्शाता है.
कांग्रेस को इसका जवाब पहले भी जनता से मिल चुका है और आगे भी जनता उसे जवाब देगी. वर्ष 2029 और आने वाले चुनावों में भी Prime Minister मोदी को जनता का समर्थन मिलेगा. कांग्रेस पार्टी मानसिक रूप से दिवालिया हो चुकी है. वह हताश है और उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है. यही कारण है कि कांग्रेस के नेता इस तरह के बयान दे रहे हैं और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. आने वाले समय में लोकतंत्र की आवाज को और मजबूत करना है और एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होकर रहेगी. India को घुसपैठिए नहीं चलाएंगे, बल्कि India के नौजवान और देश के मतदाता ही देश का भविष्य तय करेंगे. एसआईआर के विरोध की आड़ में कोई भी घुसपैठियों के सहारे Government नहीं बना पाएगा और न ही घुसपैठियों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने दिया जाएगा.
–
डीकेपी/


