भारत-आईएमएफ की अहम बैठक: विकास दर, वैश्विक व्यापार बदलाव और आर्थिक सहयोग पर हुई चर्चा

New Delhi, 7 सितंबर . केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क के बीच Monday को राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस दौरान India की विकास संभावनाओं, वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों, व्यापारिक परिदृश्य और व्यापक आर्थिक सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई.

वित्त मंत्रालय के अनुसार, India दौरे पर आए नाइजेल क्लार्क ने वित्त मंत्री सीतारमण से मुलाकात कर भारत-आईएमएफ संबंधों की समीक्षा की और उन वैश्विक तथा घरेलू आर्थिक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया जो आने वाले वर्षों में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं.

बैठक में India की बदलती विकास यात्रा, वैश्विक व्यापार प्रणाली में आ रहे बदलाव और हाल ही में संपन्न द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के प्रभाव पर विशेष चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में India और आईएमएफ के बीच निरंतर संवाद और सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

वित्त मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने, सुदृढ़ आर्थिक नीतियों को समर्थन देने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भारत-आईएमएफ साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

बैठक में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता केंद्र (एसएआरटीटीएसी) को लेकर भी चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने इस संस्थान में India के योगदान की सराहना की और माना कि यह संस्था दक्षिण एशियाई देशों में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और आर्थिक प्रबंधन से जुड़ी विशेषज्ञता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

इसके अलावा, India और वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया. वैश्विक व्यापार मार्गों में बदलाव, भू-Political तनाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच India की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन किया गया.

नाइजेल क्लार्क ने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच India के आर्थिक प्रदर्शन और उसकी मजबूती की सराहना की. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद India ने विकास और आर्थिक स्थिरता का मजबूत रिकॉर्ड बनाए रखा है.

आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक ने केंद्र Government द्वारा राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में उठाए गए कदमों की भी सराहना की. साथ ही पश्चिम एशिया संकट के बाद अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और नागरिकों तथा उद्योगों को राहत पहुंचाने के लिए उठाए गए Governmentी कदमों को भी सकारात्मक बताया.

डीबीपी

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