
अयोध्या, 14 सितंबर . Samajwadi Party (एसपी) के सांसद अवधेश प्रसाद ने ब्रिक्स बैठक में विपक्षी दलों की Government वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे भाजपा की “लोकतंत्र-विरोधी सोच” का संकेत बताते हुए कहा कि ऐसे कदम लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करते हैं.
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है, उन्हें ब्रिक्स कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और Political दलों का लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मान होना चाहिए. विपक्षी मुख्यमंत्रियों की गैर-मौजूदगी को लेकर उन्होंने केंद्र Government की नीयत पर सवाल उठाए.
अयोध्या में राम मंदिर चंदे से जुड़े विवाद पर भी सपा सांसद ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ट्रस्ट को लाखों रुपये के चंदे के साथ-साथ सोना, चांदी, नकद और जमीन भी प्राप्त होती है. अवधेश प्रसाद ने कहा यदि कोई कोषाध्यक्ष यह कहता है कि उसने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए और संबंधित स्थान का दौरा तक नहीं किया, तो यह गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना स्थिति है. उन्होंने ट्रस्ट में पदोन्नति को लेकर भी सवाल उठाए.
ब्रिक्स डिनर के मेनू को लेकर Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पोस्ट पर भी अवधेश प्रसाद ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि India विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग प्रकार के पहनावे और भोजन की परंपराएं हैं. उनके मुताबिक सभी तरह के भोजन का सम्मान किया जाना चाहिए, साथ ही देश की परंपराओं और मान्यताओं का संरक्षण भी जरूरी है.
वहीं, सपा के चुनावी घोषणा पत्र को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि पार्टी के लिए घोषणापत्र केवल चुनावी दस्तावेज नहीं, बल्कि “पवित्र दस्तावेज” की तरह है. उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरी तरह लागू करने का प्रयास किया जाता है.
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी घोषणापत्र में प्रत्येक जिले की स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास योजनाएं शामिल की जाएं, तो यह राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का विकास तभी व्यापक रूप से संभव है, जब जिलों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं.
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एसएके/पीएम