बिहार : फल्गु नदी के कायाकल्प में जुटा गया जिला प्रशासन, पौधरोपण से लेकर भूजल संरक्षण तक बनेगी कार्ययोजना

गयाजी 25 अक्टूबर . बिहार की फल्गु नदी के कायाकल्प और जीर्णोद्धार को लेकर गया जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और आसपास के क्षेत्रों में गिरते भूजल स्तर में सुधार के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी की जा रही है. इसके तहत नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण, खराब बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण की कार्ययोजना बनाई जा रही है.
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में फल्गु नदी के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई थी. बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन की योजना है कि गया जिले में फल्गु नदी के दोनों किनारों का विस्तृत सर्वेक्षण कराकर पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थलों को चिह्नित किया जाए. इसके लिए वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित अंचलों के पदाधिकारी संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण करेंगे.
पौधरोपण से नदी के आसपास हरित क्षेत्र का विस्तार करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का लक्ष्य है. भूजल स्तर में सुधार के लिए भी विशेष पहल की जा रही है. जल संसाधन विभाग ने गया, बोधगया और डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब बोरवेल चिह्नित किए हैं. इन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, ताकि वर्षा जल का उपयोग भूजल पुनर्भरण के लिए किया जा सके. नदी के दोनों किनारों पर पांच-पांच किलोमीटर के क्षेत्र में जल संरक्षण की संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा.
इसके अतिरिक्त, जलजमाव वाले स्थानों पर सोख्ता निर्माण और बड़े Governmentी भवनों एवं प्रमुख प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. इससे वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी. लघु सिंचाई विभाग को संबंधित क्षेत्र में मौजूद आहर, पोखर और पइन का भौतिक निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है. जहां जरूरत होगी, वहां पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन अथवा नए निर्माण की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा कि फल्गु नदी का संरक्षण और कायाकल्प प्रशासन की प्राथमिकता है. नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के साथ आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. हमारा प्रयास है कि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो और फल्गु नदी के आसपास जल संरक्षण की व्यवस्था मजबूत बने.
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एमएनपी/पीएम


