
Patna, 17 सितंबर . बिहार के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन की सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से जीविका द्वारा संचालित सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र यानी ‘जीविका-दीदी की लाइब्रेरी’ ग्रामीण किशोरों और युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार खोल रही है. इन पुस्तकालयों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है.
विभाग के मुताबिक, वर्तमान में बिहार में संकुल स्तरीय संघों के माध्यम से 118 ‘जीविका-दीदी की लाइब्रेरी’ का संचालन किया जा रहा है. ये केंद्र सप्ताह के सातों दिन सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहते हैं. राज्यभर में इन पुस्तकालयों में एक समय में 5,000 से 7,000 से अधिक शिक्षार्थियों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था है. अब तक एक लाख से अधिक किशोर और युवा इन पुस्तकालयों से जुड़ चुके हैं.
बताया गया कि इन केंद्रों पर प्रतिदिन औसतन 50 से 70 शिक्षार्थी पहुंचते हैं, जिनमें करीब 61 प्रतिशत लड़कियां हैं. इस तरह सभी 118 पुस्तकालयों में प्रतिदिन लगभग 5,000 से 7,000 बच्चे विभिन्न सेवाओं और कार्यक्रमों का लाभ उठा रहे हैं. ‘दीदी की लाइब्रेरी’ का स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन संबंधित क्षेत्र के संकुल स्तरीय संघ द्वारा किया जाता है. प्रत्येक केंद्र पर एक प्रशिक्षित सामुदायिक पेशेवर ‘विद्या-दीदी (डिजिटल एडुप्रेन्योर)’ के रूप में कार्य करती हैं.
वह पुस्तकालय के दैनिक संचालन, समन्वय, सुरक्षा और उपलब्ध सेवाओं को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी संभालती हैं. इन पुस्तकालयों में भौतिक पुस्तकों के साथ समाचार पत्र और पत्रिकाएं उपलब्ध हैं. विद्यार्थियों को शांत और अनुकूल अध्ययन का वातावरण मिलता है. इसके अलावा कंप्यूटर, टैबलेट, इंटरनेट और ऑनलाइन पठन-पाठन सामग्री के माध्यम से डिजिटल पुस्तकालय की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.
प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं को मार्गदर्शन देने के साथ करियर, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है. ऑनलाइन आवेदन में सहायता, करियर काउंसिलिंग और मेंटरिंग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए एनआईओएस, बीबीओएसई और इग्नू जैसे संस्थानों में नामांकन में भी सहायता दी जाती है.
आजीविका संवर्द्धन के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस पहल का असर सारण जिले के सोनपुर प्रखंड की नया गांव पंचायत में भी देखने को मिल रहा है. यहां की रहने वाली चांद मुनि देवी के बेटे ने ‘जीविका-दीदी की लाइब्रेरी’ में पढ़ाई की और अब बिहार Police में नौकरी कर रहा है. चांद मुनि देवी जीविका के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं.
उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी खुलने के बाद उनके बेटे को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल और जरूरी संसाधन मिले, जिसका परिणाम उसे बिहार Police में नौकरी मिलने के रूप में सामने आया. उन्होंने कहा कि ‘जीविका-दीदी की लाइब्रेरी’ उनके जैसे सैकड़ों परिवारों के सपनों को नई उड़ान दे रही है. उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देने की बात कही. जीविका की यह पहल ग्रामीण बिहार में शिक्षा और अवसरों के बीच की दूरी कम करने के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है.
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एमएनपी/एसके