बच्चियों के आत्मसम्मान को समझने के लिए शिक्षकों को तैयार कर रही योगी सरकार

Lucknow, 9 सितंबर . यूपी Government बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी क्रम में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मुद्दों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है. रूप-रंग अथवा शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाना, स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या रूप-रंग के आधार पर देखना, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को पहचानना, social media का प्रभाव तथा लैंगिक रूढ़ियां प्रशिक्षण के प्रमुख विषय हैं.

विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंच कार्यक्रम एवं सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए आज से दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया है. व्यापक प्रशिक्षण रूपरेखा में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने का लक्ष्य है. इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सम्मानजनक वातावरण मजबूत हो तथा हर बालिका आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सके.

प्रशिक्षण में नव-विकसित चार कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है. इनके माध्यम से रूप-रंग और शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने एवं परेशान करने, शरीर को लेकर बच्चों की धारणाओं, अपने शरीर से जुड़ाव एवं उसकी क्षमताओं तथा social media के प्रभाव जैसे विषयों को समझाया जा रहा है. इन संसाधनों के उपयोग से बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों का भी प्रदर्शन होगा. प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर काम हो रहा है.

एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने, बिना पूर्वधारणा के संवाद करने, सभी आवाजों को महत्व देने और अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है. लैंगिक रूढ़ियों की पहचान तथा कॉमिक्स और कक्षा गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों पर संवाद का भी अभ्यास हो रहा है. प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) पर चर्चा के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया. मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास हुआ. बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्रित, दस्तावेजीकृत और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम होगा.

दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की समझ विकसित की जाएगी. समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से इसके सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा. ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की जानकारी भी दी जाएगी. उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम India Government एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा होगी. मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालय की जिम्मेदारियों के अंतर्गत सुरक्षित शौचालय, पानी, आवश्यक उत्पाद, निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालयी स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा.

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि Government बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है. रूप-रंग, शारीरिक बनावट, social media और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए बेहद आवश्यक है. मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी.

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है. प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, social media के प्रभाव, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा रहा है. प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाएगी.

विकेटी/डीकेपी

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