
New Delhi, 31 अगस्त . पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को लेकर छिड़ी अंदरूनी लड़ाई अब बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपों में बदल गई है. विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा करते हुए कहा है कि पार्टी के खाते से करीब 30 करोड़ रुपए अभिषेक बनर्जी से जुड़ी बताई जा रही ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ कंपनी में ट्रांसफर किए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सिंबल विवाद की आड़ में असल में फंड के इस खेल से ध्यान भटका रही है, और Supreme Court में सॉलिसिटर जनरल के बयान के बाद यह मामला देश के सबसे बड़े Political घोटालों में से एक बन गया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “सिर्फ चुनाव चिन्ह का जिक्र मत करो, हर चीज के बारे में बोलो; चुनाव चिन्ह के साथ-साथ फंड का भी जिक्र था, और उनकी नजरें पूरी तरह से फंड पर टिकी हैं, क्योंकि जब यह सब सामने आएगा कि पार्टी का पैसा भतीजे की कंपनी को भेजा जा रहा है, तो छवि को और भी ज्यादा नुकसान होगा. इसीलिए वे नैरेटिव बनाने की इतनी जल्दी में हैं. जब दोनों पक्षों ने इलेक्शन कमीशन को लिख दिया है तो इतनी जल्दी क्या है, इसलिए सबसे बड़ी संस्था और उसके आने वाले फैसले पर थोड़ा सब्र रखें.”
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “पूरे India के Political इतिहास में ऐसा कभी हुआ है, कोई सोच भी नहीं सकता था, जहां कोई अकाउंट या रिकॉर्ड बुक नहीं है और जो ‘डॉ.’ ममता बनर्जी कहती हैं, वही सही माना जाता है. Supreme Court में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि लगभग 30 करोड़ रुपए लीप्स एंड बाउंड्स नाम की कंपनी को ट्रांसफर किए गए, जो अभी एसएससी स्कैम में जांच के दायरे में है और चार्जशीटेड है. यह बहुत बड़ा घोटाला है, ऐसा India में किसी भी Political दलों में कभी नहीं हुआ.”
वहीं, दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा Government पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि Government विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए Governmentी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है.
अभिषेक बनर्जी ने social media पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भाजपा Government सिर्फ तीन दिन पहले हमारी पार्टी का साइन बोर्ड गैर-कानूनी तरीके से हटाने से ही संतुष्ट नहीं थी. आज, फायर सेफ्टी ऑडिट करने के लिए हमारे पार्टी ऑफिस में फायर डिपार्टमेंट को भेजा गया है और जाहिर है, साथ में कैमरे, पब्लिसिटी स्टंट और मीडिया का वही पुराना तमाशा भी है. वाह! प्रशासन के इस जोश को देखकर प्रभावित हुए बिना कोई नहीं रह सकता.”
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रशासनिक सक्रियता तब क्यों नहीं दिखी, जब चुनाव से ठीक एक महीने पहले एक रहस्यमय आग में हजारों चुनावी मशीनें जलकर खाक हो गई थीं. अभिषेक ने लिखा, “अफसोस की बात है कि यह जबरदस्त जोश तब कहीं नहीं दिखा था, जब चुनाव के सिर्फ एक महीने के अंदर ही एक रहस्यमयी आग में 4,000 कंट्रोल यूनिट, 4,000 बैलेट यूनिट और 4,000 वीवीपैट जलकर खाक हो गए थे. तब फायर सेफ्टी को लेकर ऐसी चिंता क्यों नहीं हुई? किसी के मन में फायर ऑडिट का ख्याल क्यों नहीं आया? उस समय कैमरों के सामने प्रशासन की यह भाग-दौड़ कहां थी?”
तृणमूल नेता ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि 12 हजार चुनावी मशीनों के जलने पर Government को कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन विपक्षी पार्टी के कार्यालय पर फायर सेफ्टी को लेकर अचानक चिंता जाग उठी है.
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केके/एमएस