बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर सीपीआईएम की विशेष तैयारी, उम्मीदवार चुनने की नई रणनीति अपनाई

कोलकाता, 4 सितंबर . पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की मुख्य पार्टी सीपीआई-एम ने राज्य में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी समेत शहरी निकायों के लिए होने वाले आगामी चुनावों में उम्मीदवारों के चयन के लिए एक नई रणनीति अपनाई है. ये चुनाव इसी साल के आखिर में होने हैं.

राज्य नेतृत्व ने तय किया है कि लेफ्ट फ्रंट के मौजूदा सहयोगियों के बीच सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला तय करने का काम राज्य समिति के बजाय जिला समितियों को सौंपा जाए. स्थानीय निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन का काम भी जिला समितियां ही करेंगी, न कि राज्य नेतृत्व इसमें दखल देगा.

हालांकि, सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने कहा कि अगर किसी जिला समिति को लेफ्ट फ्रंट के बाहर किसी Political गुट के साथ गठबंधन की जरूरत महसूस होती है, तो ऐसा राज्य समिति की सहमति से ही किया जाएगा.

साथ ही, केंद्रीय समिति के नेता ने जोर देकर कहा कि पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व का मानना ​​है कि किसी भी हालत में जिला समितियों को तृणमूल कांग्रेस के तीन मौजूदा गुटों में से किसी के साथ भी कोई समझौता करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. इन तीन गुटों में पहला, पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट; दूसरा, तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक रिताब्रता बनर्जी का गुट; और तीसरा, तृणमूल के उन 20 Lok Sabha सदस्यों का समूह जो लगभग खत्म हो चुकी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं.

केंद्रीय समिति के सदस्य ने कहा, “हमें पहले ही इनमें से कुछ गुटों से जिला स्तर पर सीट-शेयरिंग के समझौते के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन हमारा जवाब साफ तौर पर ‘नहीं’ है. हमारा मौजूदा लक्ष्य पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा फिर से हासिल करना है और आने वाले शहरी निकाय चुनाव इस दिशा में शुरुआत करने का सबसे अच्छा मौका हैं. साथ ही, हम किसी ऐसी ताकत के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे जिसे राज्य की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया हो और जो आपसी गुटबाजी के कारण अपनी विश्वसनीयता खो चुकी हो.”

वहीं, राज्य सचिवालय के एक सदस्य ने कहा कि कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के समझौते की संभावना लगभग न के बराबर है. सचिवालय सदस्य ने कहा, “2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस नेतृत्व ने ही एकतरफा तौर पर लेफ्ट फ्रंट के साथ पुराने चुनावी गठबंधन को तोड़ने की घोषणा की थी. इसलिए, आने वाले शहरी निकाय चुनावों में उस गठबंधन को फिर से बहाल करने की कोई संभावना नहीं है. बेहतर यही है कि हम लेफ्ट फ्रंट के तौर पर अकेले चुनाव लड़ें, ताकि हमें पता चल सके कि हमारी स्थिति क्या है.”

एससीएच/डीएससी

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