फैन मर्डर केस: बेंगलुरु कोर्ट ने यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स को नोटिस जारी किया

Bengaluru, 7 अक्टूबर . Bengaluru में चर्चित रेणुकास्वामी हत्या मामले की सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट ने पहली बार social media प्लेटफॉर्म्स को सीधे नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई से जुड़े वीडियो social media पर प्रसारित किए जाने को गंभीरता से लेते हुए यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स को ऐसे वीडियो हटाने का निर्देश दिया है.

59वीं सत्र अदालत ने Wednesday को यह नोटिस जारी किया. कोर्ट के निर्देश के बाद social media प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किए जा रहे सुनवाई के वीडियो हटाए जाने लगे हैं.

अदालत ने Police को मामले की सुनवाई की रिकॉर्डिंग करने और उसे social media पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है. Police को विशेष रूप से ऐसे लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जो सुनवाई की रिकॉर्डिंग कर उसे वायरल करते पाए जाएंगे.

यह कार्रवाई आरोपी से Governmentी गवाह बने प्रदोष एस. राव से जुड़ी अदालती कार्यवाही के वीडियो social media पर सामने आने के बाद की गई है. आरोप है कि कुछ social media इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स ने अदालत की कार्यवाही के कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड कर अपने प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया.

कोर्ट ने सुनवाई की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उसके प्रसार पर गंभीर आपत्ति जताते हुए ऐसे कंटेंट को आगे प्रसारित होने से रोकने के लिए निर्देश जारी किए हैं.

अब तक ऐसे मामलों में Police आम तौर पर संबंधित social media प्लेटफॉर्म से संपर्क कर वीडियो हटाने के लिए नोटिस जारी करती थी और कंटेंट अपलोड करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज करती थी. लेकिन ताजा आदेश में ट्रायल कोर्ट ने सीधे social media प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया है.

अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट की कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उसे social media पर प्रसारित करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इसमें अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शामिल है.

यह मामला रेणुकास्वामी की हत्या से जुड़ा है, जिसमें कन्नड़ Actor दर्शन थुगुदीपा और कई अन्य आरोपी हैं. मामले की सुनवाई Bengaluru की 59वीं सत्र अदालत में चल रही है.

हाई-प्रोफाइल रेणुकास्वामी हत्या मामले में आरोपी नंबर 14 प्रदोष राव को Governmentी गवाह का दर्जा दिया गया है. वह मजिस्ट्रेट के समक्ष कई पन्नों वाले गोपनीय इकबालिया बयान को दर्ज करा रहा था.

बंद या प्रतिबंधित अदालती कार्यवाही से जुड़े वीडियो क्लिप social media पर वायरल होने के बाद सत्र अदालत ने इसे गंभीरता से लिया. कोर्ट ने लीक हुए कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने को लेकर social media प्लेटफॉर्म्स पर भी नाराजगी जताई है.

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डीएससी

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