पूर्वोत्तर का चुनौतीपूर्ण भूभाग और रणनीतिक स्थान इंजीनियरिंग नवाचार के बड़े अवसर देता है: मिजोरम के राज्यपाल

New Delhi/आइजोल, 20 सितंबर . मिजोरम के Governor जनरल वीके सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र का मुश्किल इलाका, पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील स्थिति और रणनीतिक लोकेशन इंजीनियरिंग से जुड़ी जटिल चुनौतियां तो पैदा करते ही हैं, साथ ही इनोवेशन के लिए बड़े मौके भी देते हैं.

Governor ने ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) इंडस्ट्री एंड एजुकेशन एक्सीलेंस समिट एंड अवार्ड-2026’ को संबोधित करते हुए पूर्वोत्तर India की खास स्थिति पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का मुश्किल इलाका, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और रणनीतिक स्थिति इंजीनियरिंग के लिए बड़ी चुनौतियां तो पैदा करती हैं, लेकिन साथ ही इनोवेशन के मौके भी देती हैं.

उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र मुश्किल इलाकों में मजबूत इंजीनियरिंग के लिए एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ (जीवंत प्रयोगशाला) बन सकता है. खासकर मिजोरम यह दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा क्यों होना चाहिए, जो इलाके की भौगोलिक स्थिति के अनुकूल हो, जलवायु परिवर्तन का सामना कर सके और डिजिटल रूप से सक्षम हो.”

वीके सिंह ने कहा कि India का भविष्य मजबूती से इंजीनियरों के हाथों में है. उन्होंने इंजीनियरों से ‘विकसित India 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया.

यह कार्यक्रम New Delhi के एससीओपीई कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया था. यह समिट ‘इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट’ (India की वैश्विक इंजीनियरिंग पहचान: टेक्नोलॉजी, टैलेंट और भरोसा) थीम पर आयोजित की गई थी.

Governor ने कहा कि India के विकास के इतिहास में इंजीनियरों की अहम भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि अब देश सिर्फ बाजार के लिए नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी में लीडरशिप और मजबूती के लिए भी प्रतिस्पर्धा करते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि India के पास बड़ी संख्या में बेहतरीन वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा मौजूद है. इसका सही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय इंजीनियरिंग गुणवत्ता, विश्वसनीयता और भरोसे का पर्याय बन सके. उन्होंने इंजीनियरों से इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने का आग्रह किया.

Governor ने India की स्थिति और डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष कार्यक्रम, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, डिफेंस इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती हुई टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में और प्रगति की जरूरत के बारे में बात की. उन्होंने इन क्षेत्रों में इंजीनियरों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया.

उन्होंने कहा कि सिर्फ बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करना ही काफी नहीं है. उन्होंने आगे कहा, “भविष्य के इंजीनियर में तकनीकी गहराई और सिस्टम-आधारित सोच (सिस्टम्स थिंकिंग) का मेल होना चाहिए. हमें इंजीनियरिंग शिक्षा को सिर्फ इस आधार पर नहीं आंकना चाहिए कि कितनी डिग्रियां दी गईं, बल्कि इस आधार पर आंकना चाहिए कि वे इंजीनियर क्या बनाने में सक्षम हैं.”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि गुणवत्ता और मानकों को रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देखा जाना चाहिए, ताकि India की टेक्नोलॉजी और प्रतिभा दूसरे देशों का भरोसा जीत सके.

इस समिट में इंडस्ट्री के लीडर्स, पॉलिसी बनाने वाले, शिक्षाविद और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स एक साथ आए, ताकि ग्लोबल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में India की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की जा सके. 1920 में स्थापित ‘द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)’ देश में इंजीनियरों का सबसे बड़ा मल्टी-डिसिप्लिनरी (कई क्षेत्रों से जुड़ा) प्रोफेशनल संगठन है, जिसके 2.6 लाख से ज्यादा कॉर्पोरेट सदस्य 15 इंजीनियरिंग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

एससीएच/डीकेपी

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