
हैदराबाद, 11 सितंबर . हैदराबाद Police ने Friday को India राष्ट्र समिति (बीआरएस) के छात्र विंग की विधानसभा का घेराव करने की कोशिश को नाकाम कर दिया. वे फीस रिइम्बर्समेंट फंड जारी करने और पॉलिटेक्निक कॉलेजों को ‘यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी’ में मिलाने वाले Governmentी आदेश को रद्द करने की मांग कर रहे थे.
बीआरएसवी के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने बीआरएसवी के राज्य अध्यक्ष गेल्लू श्रीनिवास यादव की अगुवाई में एलबी स्टेडियम से विधानसभा तक मार्च करने की कोशिश की.
वे मांग कर रहे थे कि Government फीस रिइंबर्समेंट (फीस वापसी) का बकाया जारी करे और Governmentी पॉलिटेक्निक कॉलेजों को स्किल्स यूनिवर्सिटी में मिलाने वाले Governmentी आदेश 97 को रद्द करे.
हाथों में प्लेकार्ड और बैनर लिए प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगा रहे थे. Police ने प्रदर्शनकारियों को रोका, जिन्होंने विधानसभा भवन की ओर आगे बढ़कर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और Police के बीच धक्का-मुक्की हुई.
Policeकर्मियों ने गेल्लू श्रीनिवास यादव समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें उठाकर Police की गाड़ियों में बैठाया, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग Police स्टेशनों में ले जाया गया.
विपक्षी पार्टियां फीस रिइंबर्समेंट का बकाया जारी करने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं. उनका कहना है कि लगभग 40 लाख छात्रों का भविष्य, खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों का 15,000 करोड़ रुपए के बकाया फीस रिइंबर्समेंट के कारण खतरे में है.
इसी तरह का एक विरोध मार्च 7 सितंबर को भाजपा की युवा शाखा बीजेवाईएम ने भी आयोजित किया था. Police ने राज्य भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था.
बीआरएस ने आरोप लगाया कि फीस रिइंबर्समेंट के बकाये जैसे मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए उसके विधायकों को पूरे मॉनसून सत्र के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया था.
इस बीच, बीआरएस सदस्यों ने Friday को विधान परिषद में Governmentी आदेश 97 का मुद्दा उठाया. पार्टी ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया और राज्य Government के इस “गलत सोच वाले” कदम पर तत्काल बहस की मांग की.
3 जुलाई, 2026 को जारी Governmentी आदेश 97 के तहत श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण और कारखाना विभाग का नाम बदलकर शक्ति (स्किल, ह्यूमन कैपिटल एंड नॉलेज ट्रेनिंग इनिशिएटिव्स) कर दिया गया और Governmentी पॉलिटेक्निक कॉलेजों को वाईआईएसयू के दायरे में लाया गया.
पॉलिटेक्निक कॉलेजों के छात्र इस Governmentी आदेश का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे ‘स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’ के ढांचे और ‘इंजीनियरिंग कॉमन एंट्रेंस टेस्ट’ की लेटरल-एंट्री स्कीम तक उनकी पहुंच प्रभावित हो सकती है; इस स्कीम के तहत डिप्लोमा होल्डर्स सीधे अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं.
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एससीएच/पीएम