पीएम मोदी ने 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में इंफ्रास्ट्रक्चर को परियोजनाओं से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित बनाया

New Delhi, 26 अक्टूबर . नीति आयोग के सदस्य और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने Monday को Prime Minister Narendra Modi के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों पर लिखे एक लेख में कहा है कि इस दौरान India में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की योजना बनाने और उसे लागू करने के तरीके में बुनियादी बदलाव आया है.
Prime Minister कार्यालय (पीएमओ) ने इस लेख को साझा करते हुए कहा कि Prime Minister मोदी के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित न रखकर नागरिकों की जरूरतों और समग्र आर्थिक उत्पादकता से जोड़कर देखा गया है.
राजीव गौबा ने अपने लेख में लिखा कि पिछले वर्षों में रेलवे, सड़क, बंदरगाह और शहरी परिवहन क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं. समर्पित माल गलियारों, रेलवे विद्युतीकरण, वंदे India ट्रेनों और आधुनिकीकृत रेलवे स्टेशनों ने रेल नेटवर्क को नई पहचान दी है.
वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार, नए एक्सप्रेसवे, बंदरगाहों का विकास और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार ने देश की कनेक्टिविटी को नई दिशा प्रदान की है. हालांकि उनके अनुसार इन उपलब्धियों से भी अधिक महत्वपूर्ण बदलाव यह रहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर को देखने का Governmentी दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया.
उन्होंने कहा कि पहले बुनियादी ढांचे का विकास अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों के स्तर पर किया जाता था, लेकिन आम नागरिक किसी सड़क, रेल, बंदरगाह या बिजली व्यवस्था को अलग-अलग नहीं बल्कि एक एकीकृत प्रणाली के रूप में अनुभव करता है. यदि इस शृंखला की कोई एक कड़ी कमजोर हो, तो बाकी निवेशों का लाभ भी सीमित हो जाता है. यही कारण है कि Prime Minister मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल परिसंपत्ति निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाले व्यापक परिणामों के रूप में देखा.
नीति आयोग के सदस्य ने आगे कहा कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है. भूमि अधिग्रहण, विभिन्न मंजूरियां, उपयोगिताओं के स्थानांतरण, कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे और केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय जैसी चुनौतियां अक्सर परियोजनाओं में देरी का कारण बनती हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति मंच की शुरुआत की गई, जहां विभिन्न विभागों और प्राधिकरणों को एक साथ लाकर परियोजनाओं की समीक्षा की जाती है और अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जाता है.
उन्होंने लेख में बताया कि पीएम गति शक्ति और प्रगति Prime Minister मोदी की प्रशासनिक सोच की दो महत्वपूर्ण मिसालें हैं. एक ओर गति शक्ति पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर तंत्र को एकीकृत दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती है, वहीं प्रगति परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली विशिष्ट बाधाओं को दूर करने का माध्यम बनती है.
उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण दिखाता है कि किस प्रकार Government बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भी जमीनी स्तर की समस्याओं पर समान रूप से फोकस कर सकती है.
राजीव गौबा ने अपने लेख में कहा कि Prime Minister मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल सड़कों, रेलवे लाइनों या अन्य भौतिक परिसंपत्तियों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह है कि उन्होंने राज्य की सोच को बदलते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को एक एकीकृत, नागरिक-केंद्रित और परिणामोन्मुखी व्यवस्था के रूप में स्थापित किया. उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ देश की आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
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