
New Delhi, 9 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi के जन्मदिन पर प्रस्तावित कार्यक्रम, एफिल टॉवर विवाद और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात को लेकर राजद सांसद मनोज झा ने केंद्र Government पर निशाना साधा. उन्होंने छात्रों की समस्याओं, बिहार की स्थिति और ब्रिक्स की भूमिका को लेकर सवाल उठाए.
Prime Minister मोदी के जन्मदिन पर प्रस्तावित कार्यक्रम को मनोज झा ने दुखद और विडंबनापूर्ण बताया. सत्य निकेतन हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रावासों की कमी और छात्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दे गंभीर हैं. युवाओं के बीच ईमानदार परीक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे विषय प्रमुख चिंता हैं. ऐसे समय में Prime Minister के जन्मदिन को लेकर बड़े आयोजनों को उन्होंने उचित प्राथमिकता नहीं बताया. उन्होंने व्यंग्य करते हुए ‘रोम और नीरो’ का संदर्भ दिया और कहा कि इससे Government को कोई उपलब्धि नहीं मिलेगी, बल्कि देश की ‘जग हंसाई’ होगी.
एफिल टॉवर से जुड़े विवाद पर राजद सांसद ने कहा कि यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. उन्होंने विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर India के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया. राजद सांसद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस घटनाक्रम को लेकर India चर्चा में आया है. उन्होंने संबंधित संगठन की Prime Minister के साथ तस्वीरों और संपर्कों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि ऐसे विवादों के बीच विदेश मंत्रालय को सार्वजनिक बयान देते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए. सत्य निकेतन हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि जनता इन घटनाओं को आसानी से नहीं भूलेगी.
Prime Minister मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर मनोज झा ने कहा कि अब इस टिप्पणी का रिकॉर्ड ‘घिस’ चुका है और इस पर प्रतिक्रिया देने का भी मन नहीं करता. उन्होंने बिहार की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए Prime Minister से राज्य पर ध्यान देने की अपील की. झा ने कहा कि उन्हें Gujarat से कोई समस्या या ईर्ष्या नहीं है, लेकिन यदि Prime Minister विकास और निवेश को लेकर पहल कर रहे हैं तो बिहार को भी उसका लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि क्या Prime Minister केवल 2029 के बिहार चुनाव के दौरान ही राज्य की ओर ध्यान देंगे.
ब्रिक्स सम्मेलन में Prime Minister Narendra Modi और रूस के President व्लादिमीर पुतिन की संभावित बातचीत पर मनोज झा ने कहा कि ब्रिक्स को लेकर गंभीर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण की जरूरत है. ब्रिक्स के सामने कई चुनौतियां हैं और सदस्य देशों के बीच आंतरिक मतभेद भी मौजूद हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े अमेरिका-इजराइल संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.
राजद सांसद ने ब्रिक्स की साझा मुद्रा से जुड़ी चर्चाओं और अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन इसे केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ के नजरिए से देखना उचित नहीं होगा. संगठन को वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियों पर ठोस भूमिका निभाने की जरूरत है.
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पीएसके