पीएम मोदी के लिए लिखे लता मंगेशकर के उस खत की कहानी, जिसमें भेजी थी मंगल-मूर्ति

New Delhi, 27 सितंबर . “नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा. मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहें.” यह कहानी है, हिंदुस्तान की सबसे मशहूर आवाज रहीं लता मंगेशकर की, जिन्हें हर किसी ने प्यार से ‘लता दीदी’ बुलाया. ‘स्वर साम्राज्ञी’ और ‘India की कोकिला’ जैसे विशेषण लता मंगेशकर के लिए गढ़े गए. संगीत उनके खून में बसा था. उनके गाने न सिर्फ India में, बल्कि Pakistan और बांग्लादेश समेत कई अन्य देशों में भी सुने और पसंद किए जाते थे. उनके गाए कई सदाबहार गीत आज भी हर पीढ़ी की जुबान पर रहते हैं.

28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने 1940 के दशक से अपने करियर की शुरुआत की और 36 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए. कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2001 में उन्हें ‘India रत्न’ से सम्मानित किया गया था, हालांकि संगीत की दुनिया से इतर लता मंगेशकर का Political संबंध भी रहा और उससे भी दिलचस्प यह कि Prime Minister Narendra Modi के साथ उनके संबंध मधुर रहे.

पिछले एक दशक या उससे अधिक समय में वह Prime Minister Narendra Modi और उनकी पार्टी भाजपा के समर्थन में काफी मुखर रहीं. भाजपा के समर्थन से मंगेशकर नवंबर 1999 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं. वह 2005 तक वहां रहीं. 2013 में उन्होंने Narendra Modi को Prime Minister पद के लिए समर्थन दिया था. इसके बाद कई अवसर ऐसे रहे, जब Prime Minister Narendra Modi और लता दीदी के बीच रिश्ते परिवार जैसे दिखाई दिए.

लता मंगेशकर Prime Minister को ‘नरेंद्र भाई’ कहकर बुलाती थीं. दोनों के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता था. हर साल रक्षाबंधन पर वे पीएम मोदी को राखी भेजती थीं. किताब ‘मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ में लता मंगेशकर की लिखी प्रस्तावना शामिल है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र किया.

इसमें लता मंगेशकर ने बताया कि उन्होंने नरेंद्र ‘भाई’ को एक पारंपरिक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि इरादे और काम करने वाले नेता के तौर पर देखा. उन्होंने कहा था, “स्वभाव से, नरेंद्र भाई ऐसे राजनेता नहीं हैं जिनकी हम आम तौर पर कल्पना करते हैं. उनसे हुई कई बातचीत से मुझे यह एहसास हुआ है कि उनके मकसद अलग हैं. उन्हें सत्ता का कोई मोह नहीं है. उनका लक्ष्य बड़ा है. India के लोगों के लिए कुछ कर पाना. उनका जुनून इस बात में है कि वे चाहते हैं कि हमारे देश के हर व्यक्ति के लिए विकास की कहानी सार्थक हो.”

प्रस्तावना में लता मंगेशकर ने 2013 में पीएम मोदी के साथ हुई अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया, जो धीरे-धीरे भाई-बहन जैसे रिश्ते में बदल गई.

दोनों के मधुर रिश्तों का किस्सा यह है कि 2013 में, जब Narendra Modi Gujarat के Chief Minister थे, तब उनको पुणे में दीनानाथ मंगेशकर को समर्पित एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया गया था. पीएम मोदी से मिलने पर लता मंगेशकर ने कहा था- ‘मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि हम नरेंद्र भाई को Prime Minister के रूप में देखें.

अपनी प्रस्तावना में उन्होंने कहा था, “मैं एक बहुत खास पल का जिक्र करना चाहूंगी जिससे नरेंद्र भाई के साथ मेरा जुड़ाव बना. 2013 में जब वह Gujarat के Chief Minister थे, तब हमारे बुलावे पर नरेंद्र भाई ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर पुणे में हमारे दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया था. बहुत सहजता से हमारे बीच भाई-बहन का सच्चा रिश्ता बन गया और यह हमारे रिश्ते के हर पल में झलकता है. मैं हमारे इस रिश्ते को बहुत महत्व देती हूं और हमेशा देती रहूंगी.”

उन्होंने कहा था, “नरेंद्र भाई इसलिए खास हैं, क्योंकि लोग उन पर भरोसा करते हैं. लोग जानते हैं कि चाहे चुनौती कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, वह पूरी ईमानदारी और नेक नीयत से काम करेंगे और उसका समाधान निकालेंगे. नीयत और काम में ऐसा भरोसा ही एक नेता को दूसरों से अलग बनाता है. मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि देश के हर हिस्से में लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं, जो ऐसे मुद्दों पर बात करते हैं जिनसे लोग जुड़ाव महसूस करते हैं.”

उसी कार्यक्रम के दौरान मोदी ने उस चिट्ठी का जिक्र किया जो उन्होंने 6 महीने पहले उन्हें लिखी थी. उनके शब्दों में यह ‘उनके जीवन के सबसे बड़े उपहारों में से एक’ था. जनवरी 2014 में, Narendra Modi ने लता मंगेशकर को उनके मशहूर गाने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर सम्मानित किया. उस समय पीएम मोदी ने बताया कि कैसे इस गाने ने 1962 के शहीदों के बलिदान को भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए जिंदा रखकर ‘सेवा’ का काम किया.

2014 में लता मंगेशकर ने नरेंद्र ‘भाई’ को हाथ से लिखा एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने India के 15वें Prime Minister के तौर पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने के लिए माफी मांगी थी. उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देने के लिए पत्र के साथ ‘मंगल-मूर्ति’ गणेश की एक मूर्ति भी उपहार के तौर पर भेजी थी.

उन्होंने उस पत्र में लिखा था, “आदरणीय नरेंद्रभाई, सस्नेह नमस्कार. आपका निमंत्रण मिलने के बाद भी मेरी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण आपको न कहते हुए बहुत दुख हो रहा है. मुझे आशा है कि आप मेरी मजबूरी समझेंगे. पूरे देश ने आपका जो भव्य स्वागत किया है, वो अवर्णनीय है. हमारी मातृभूमि की बागडोर, आप जैसे महान व्यक्ति के पवित्र हाथों में जनता ने सौंपी है. आज का दिवस संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक आनंदोत्सव है. इस मंगल अवसर पर श्री मंगलमूर्ती आपको भेंट कर रही हूं. आपका बहुत बहुत अभिनंदन.”

यह रिश्ते महज औपचारिक नहीं थे, बल्कि पारिवारिक रिश्तों जैसे मजबूत थे. इसीलिए विदेश यात्रा पर निकलने से पहले पीएम मोदी भी 2019 में मंगेशकर को फोन कर जन्मदिन की बधाई देना नहीं भूले. एक भावुक बातचीत में लता मंगेशकर ने कहा, “आप खुद नहीं जानते कि आप क्या हैं. मुझे पता है कि आपके आने के बाद India की तस्वीर बदलने लगी है, जिससे मुझे बहुत खुशी होती है.” उसी बातचीत में परिवार के सदस्य की तरह लता मंगेशकर ने पीए मोदी से यह भी पूछ लिया था कि आप विदेश यात्रा से कब लौटकर आएंगे. बाद में पीएम मोदी ने भी अपना उत्तर दिया था.

लता मंगेशकर भले सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं रहीं, लेकिन अपने आखिरी के दौर में उन्होंने कई अवसरों पर मोदी Government का पक्ष लिया था, चाहे वह अगस्त 2020 में राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखे जाने के समय उनका social media पोस्ट रहा हो या 2021 में किसान आंदोलन के समय एक विदेशी गायक रिहाना को जवाब देना हो.

6 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी आवाज आज भी अमर है.

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डीसीएच/वीसी

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