पीएमके ने तमिलनाडु सरकार को मेकेदातु बांध के कारण कावेरी नदी पर अपने अधिकार खोने को लेकर चेतावनी दी

चेन्नई, 30 अगस्त . पीएमके नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने कर्नाटक Government पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध के काम में जल्दबाजी करने का आरोप लगाया है और तमिलनाडु से कावेरी के पानी पर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है.

यह बयान तब आया जब कर्नाटक के Chief Minister डीके. शिवकुमार ने कहा कि उनकी Government बांध बनाने की कोशिशें तेज करेगी और जल्द ही मंजूरी के लिए केंद्र से संपर्क करेगी.

अंबुमणि ने कहा कि यह कदम निंदनीय है, खासकर ऐसे समय में जब तमिलनाडु के लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से इस प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध हो रहा है.

Chief Minister शिवकुमार ने कहा कि मेकेदातु बांध से कर्नाटक के किसानों को वैसे ही फायदा होगा जैसे कृष्णराज सागर बांध से हुआ था.

Supreme Court के एक फैसले का जिक्र करते हुए, जिसे उन्होंने कर्नाटक के पक्ष में बताया, Chief Minister शिवकुमार ने कहा कि राज्य Government केंद्र से निर्माण की अनुमति मांगेगी.

अंबुमणि ने कहा कि इस बयान से कर्नाटक के रुख में आए बड़े बदलाव का पता चलता है. उन्होंने तर्क दिया कि यह दावा करके कि मेकेदातु से किसानों को मजबूती मिलेगी, शिवकुमार ने असल में यह संकेत दिया है कि जलाशय में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सकता है.

यह कर्नाटक के उस पहले के आश्वासन के उलट था जिसमें कहा गया था कि इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ पीने का पानी सप्लाई करना है और खेती के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

पीएमके नेता ने कहा कि ताजा बयानों से उनकी पार्टी की लंबे समय से चली आ रही चिंता सही साबित हुई है कि कर्नाटक जमा पानी का इस्तेमाल करेगा और नतीजतन तमिलनाडु के लिए कावेरी का बहाव कम हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए प्रस्तावित इस्तेमाल प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट में बताए गए उद्देश्यों से अलग है और यह अपने आप में इसे रद्द करने का काफी आधार है.

अंबुमणि ने तमिलनाडु Government से अपील की कि वह कर्नाटक के ताजा रुख को बिना देरी किए केंद्र Government और Supreme Court के सामने रखे.

उन्होंने प्रस्तावित जलाशय के आकार पर भी सवाल उठाए. जहां प्रोजेक्ट रिपोर्ट में डूब क्षेत्र का अनुमान 5,000 हेक्टेयर या लगभग 12,500 एकड़ लगाया गया था, वहीं Chief Minister शिवकुमार ने इसे 5,400 हेक्टेयर या लगभग 13,500 एकड़ बताया था. अंबुमणि ने दावा किया कि बड़े क्षेत्र की वजह से कर्नाटक प्रस्तावित 67 टीएमसी पानी से ज्यादा पानी जमा कर सकता है.

अंबुमणि ने चेतावनी दी कि बड़े जलाशय से जंगलों, वन्यजीवों और आस-पास के इकोसिस्टम को ज्यादा नुकसान हो सकता है, और कहा कि तमिलनाडु को बिना देरी किए हर उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक रास्ते से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने से रोकना चाहिए.

डीकेएम/डीएससी

Leave a Comment