पीएमएलए कोर्ट के आदेश को हेमंत सोरेन ने हाई कोर्ट में दी चुनौती, याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई 29 सितंबर को

रांची, 28 सितंबर . रांची के बड़गांईं अंचल में जमीन फर्जीवाड़े से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए (प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत के फैसले के खिलाफ Jharkhand हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

सीएम हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत द्वारा आरोप (चार्ज) तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है. याचिका की मेंटनेबिलिटी (स्वीकार्यता) को लेकर Jharkhand हाई कोर्ट में Tuesday यानी 29 सितंबर को अहम सुनवाई होनी है. यह मामला हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायाधीश मनोज प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.

दरअसल, हेमंत सोरेन की ओर से पीएमएलए कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई थी कि जब तक Enforcement Directorate (ईडी) की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ आरोप तय न किए जाएं. हालांकि, विशेष अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया था. इसके बाद Chief Minister ने हाई कोर्ट की शरण ली है. इससे पहले, रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ विवादित जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में Chief Minister सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएमएलए कोर्ट के समक्ष पेश हुए थे. सुनवाई के दौरान उन्होंने मामले से जुड़े दस्तावेजों के अवलोकन के लिए अदालत से समय देने का अनुरोध किया था.

इस पर अदालत ने टिप्पणी की थी कि वर्तमान चरण आरोप गठन का है, दस्तावेजों के निरीक्षण का नहीं. फिर भी Chief Minister के आग्रह पर विचार करते हुए अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 30 सितंबर तय की है, जब सुबह 11:15 बजे आरोप गठन के बिंदु पर आगे की सुनवाई होगी.

बता दें कि ईडी इस मामले में Chief Minister हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है. विशेष पीएमएलए अदालत इस मामले में शामिल 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित कर चुकी है, जिनमें पूर्व राजस्वकर्मी भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिपिन सिंह, राजकुमार पाहन, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन प्रमुख हैं.

हाल ही में Jharkhand हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत द्वारा सीएम सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश को बरकरार रखा था, जिससे उनके खिलाफ आरोप गठन का रास्ता साफ हो गया था.

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एसएनसी/डीकेपी

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