परिसीमन मुद्दे पर जयराम रमेश ने किरेन रिजिजू से पूछे तीन सवाल, सरकार के अगले कदम पर स्पष्टीकरण मांगा

New Delhi, 20 अक्टूबर . कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने Tuesday को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से परिसीमन के मुद्दे पर Government के रुख को लेकर तीन अहम सवाल पूछे.
उन्होंने पूछा कि क्या Government ने कोई नया प्रस्ताव तैयार किया है, और वह सर्वदलीय बैठक की विपक्ष की मांग का लगातार विरोध क्यों कर रही है?
यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर को Prime Minister Narendra Modi को अपना चौथा पत्र लिखकर मांग की कि परिसीमन के किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए.
Government की ओर से खड़गे को जवाब देते हुए रिजिजू ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि विपक्ष को नजरअंदाज किया गया है. उन्होंने दावा किया कि मार्च और अप्रैल 2026 में उन्होंने कई बार कांग्रेस से संपर्क किया था, लेकिन पार्टी की ओर से चर्चा के लिए कोई तारीख नहीं दी गई.
Union Minister ने कहा कि इसके बाद Government ने डीएमके, Samajwadi Party और शिवसेना (यूबीटी) सहित अन्य दलों से बातचीत करके आम सहमति बनाने की कोशिश की.
रमेश ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर को परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर Prime Minister को पत्र लिखा था. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने Monday को इस पत्र का जवाब दिया.”
कांग्रेस नेता ने रिजिजू के जवाब का जिक्र करते हुए कहा कि मंत्री ने मार्च 2026 में परिसीमन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कुछ Political दलों के साथ की गई ‘चुनिंदा बातचीत’ का हवाला दिया है.
हालांकि, रमेश ने आरोप लगाया कि रिजिजू के जवाब में उन वादों का कोई जिक्र नहीं है, जो गृह मंत्री ने शायद उन चर्चाओं के दौरान किए थे. ये वादे उस संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किए गए, जिसे बाद में 16 अप्रैल 2026 को Lok Sabha में पेश किया गया था.
रमेश ने कहा, “17 अप्रैल 2026 को Lok Sabha में यह विधेयक पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया था. (किरेन रिजिजू के अनुसार) जिन अधिकांश दलों से सलाह ली गई थी, उन्होंने इस विधेयक के खिलाफ वोट दिया था.”
यह तर्क देते हुए कि ‘Government को पुरानी बातचीत के अपने ब्योरे पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए’ कांग्रेस सांसद ने कहा कि रिजिजू को अब परिसीमन (डिलिमिटेशन) की आगे की प्रक्रिया से जुड़े तीन खास सवालों का जवाब देना चाहिए.
रमेश ने पूछा, “क्या मोदी Government के पास परिसीमन के लिए कोई ठोस ‘नया’ प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी भी दल के साथ चर्चा की हो?”
उन्होंने सवाल उठाया कि Government इस ‘नए प्रस्ताव’ पर सभी दलों के साथ मिलकर और पारदर्शी तरीके से चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों इनकार कर रही है?
रमेश ने आगे कहा कि विपक्षी दलों ने खड़गे के जरिए लगातार ऐसी बैठक की मांग की थी. खड़गे ने इस बारे में ‘एक-दो बार नहीं, बल्कि छह बार लिखित रूप में’ बात रखी थी, चार बार Prime Minister के सामने और दो बार खुद किरेन रिजिजू के सामने.
कांग्रेस नेता का तीसरा सवाल यह था कि क्या Government उस संविधान संशोधन विधेयक को फिर से लाने का इरादा रखती है, जो पहले ही Lok Sabha में गिर चुका है, और क्या वह इसे पास कराने की एक और कोशिश करने जा रही है?
रमेश ने सवाल किया, “क्या मोदी Government का इरादा उस हारे हुए विधेयक को वापस लाने और उसे दो-तिहाई बहुमत से पास कराने की एक और कोशिश करने का है, जो कि पूरी तरह से विवादित है और जाहिर है, फिर से फेल हो जाएगा?”
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एएसएच/एबीएम


