पाकिस्तान: राष्ट्रीय एयरलाइंस पीआईए में बड़ा घोटाला, 20 से ज्यादा कर्मियों ने लगाया 50 लाख का चूना

लाहौर, 20 अक्टूबर . Pakistan इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के 20 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर कंपनी को 50 लाख रुपए का चूना लगाया. स्थानीय मीडिया ने Tuesday को रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है. एक ऑडिट के दौरान लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रीमियम-सीट बुकिंग में कथित अनियमितताओं का पता चला था.
मई 2024 और 2025 के रिकॉर्ड ऑडिट के दौरान लाहौर फाइनेंस एंड ऑडिट कमिटी ने वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाया. अब तक, आरोपी कर्मचारियों के वेतन से कटौती करके 5,060,269 Pakistanी रुपए (पीकेआर) से अधिक की राशि वसूल की गई है और इसे पीआईए के खाते में जमा कर दिया गया है.
Pakistan के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ‘द न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, “लाहौर हवाई अड्डे पर पीआईए के ग्राउंड स्टाफ, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में प्रीमियम, एक्स्ट्रा-लेगरूम और बल्कहेड सीटों के लिए यात्रियों से सीधे अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे थे. लेकिन, इस पैसे को एयरलाइन के खाते में जमा करने के बजाय, स्टाफ ने सिस्टम रिकॉर्ड में हेरफेर करके इन सीटों को ‘स्टैंडर्ड’ या ‘सामान्य’ सीटों के रूप में दिखा दिया और वसूली गई रकम अपनी जेब में रख ली.”
रिपोर्ट्स में बताया गया कि बुकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान सामने आई ये अनियमितताएं Pakistan की राष्ट्रीय एयरलाइन यानी पीआईए में आंतरिक निगरानी, जवाबदेही और राजस्व सुरक्षा पर नए सिरे से सवाल खड़े करती हैं.
इस साल की शुरुआत में, एक रिपोर्ट के जरिए पीआईए के निजीकरण की वकालत की गई थी. इसे दशकों से चले आ रहे नुकसान को खत्म करने के लिए एक बड़े सुधार के रूप में पेश किया गया था, लेकिन यह अस्पष्ट सौदा संस्थागत भ्रष्टाचार का एक उदाहरण बन गया है.
Pakistan Government ने पीआईए की लगभग 650 अरब रुपए की पुरानी देनदारियों को एक होल्डिंग कंपनी में डाल दिया है, जिससे खरीदार को भारी संचित नुकसान से बचाया जा सके. कोलंबो स्थित ‘एशियन न्यूज पोस्ट’ के एक लेख के अनुसार, लगभग 135 अरब रुपये के मूल्यांकन पर, एक साफ-सुथरी परिचालन इकाई को आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन के नेतृत्व वाले एक निजी कंसोर्टियम को बेच दिया गया. इसमें से केवल 10 अरब रुपए के आसपास की राशि ही वास्तव में Government को नकद के रूप में मिलेगी, जबकि बाकी रकम एयरलाइन में ही इक्विटी के रूप में निवेश की जाएगी.
लेख में कहा गया है, “इस तरह, पीआईए का निजीकरण कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह केवल बोझ और फायदों को इधर-उधर करने जैसा है. जनता अभी भी 650 अरब रुपए के उस कर्ज का बोझ उठा रही है, जो वर्षों के Political हस्तक्षेप, धन की हेराफेरी और कुप्रबंधन के कारण खड़ा हुआ था. इसके बदले में, Government को बहुत कम नकद और एक छोटी इक्विटी हिस्सेदारी मिली है. साथ ही, यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि निजी प्रबंधक वहां सफल होंगे जहां Government विफल रही, जबकि एयरलाइन का पूरा प्रशासनिक ढांचा (गवर्नेंस इकोसिस्टम) अभी भी लगभग वैसा ही है, उसमें कोई खास सुधार नहीं हुआ है.”
दशकों से करदाताओं के पैसों से पीआईए का विशाल बेड़ा, अंतरराष्ट्रीय रूट और प्रमुख वैश्विक केंद्रों पर मूल्यवान लैंडिंग अधिकार निर्मित किए गए हैं. आलोचकों का कहना है कि इन संपत्तियों का हस्तांतरण प्रतिस्थापन लागत से कम मूल्य पर किया गया है. लेख में कहा गया है कि जब Government देनदारियों को वहन करती है, इक्विटी का निवेश करती है और फिर इन रणनीतिक संपत्तियों को अनुकूल शर्तों पर निजी हाथों में हस्तांतरित करती है, तो यह लेन-देन एक निष्पक्ष बाजार विनिवेश के बजाय सुधार के नाम पर धन हस्तांतरण जैसा प्रतीत होता है.
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केआर/


