
तेहरान, 20 सितंबर . ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा है कि ईरान ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि (एनपीटी) से बाहर निकलेगा या नहीं. उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी फैसला अमेरिका के रवैये पर निर्भर करेगा.
Saturday को एक इंटरव्यू में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि ईरान अभी भी अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की ओर से जारी उस धार्मिक फतवे पर कायम है, जिसमें परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाई गई है. हालांकि, हमें नहीं पता कि भविष्य में क्या होगा. रेजाई ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की शर्तों को मानना वॉशिंगटन के हित में है.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ईरान की शर्तों में सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म करना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना और ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल है. उन्होंने कहा कि कतर और Pakistan के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है और ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तों के बारे में उन्हें बता दिया है.
इस बीच, अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में अपनी कूटनीतिक बैठकों के दौरान ईरान की परमाणु गतिविधियों को एक प्रमुख मुद्दा बनाएंगे. खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत की योजना है. वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि तेहरान के साथ कारोबार करने वाली संस्थाओं को आगे और नतीजों का सामना करना पड़ सकता है.
ट्रंप Tuesday को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद वह न्यूयॉर्क में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के नेताओं से मुलाकात करेंगे.
अधिकारियों ने कहा कि इन बैठकों में ईरान एक बड़ा मुद्दा होगा. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि President ट्रंप या अमेरिका का कोई अन्य प्रतिनिधि ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेगा या नहीं.
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के दूसरे शहरों पर हमले किए थे. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और कड़ी कर दी.
इसके बाद 18 जून को अमेरिका और ईरान ने इलाके में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.
इस एमओयू के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, ताकि किसी अंतिम समझौते पर पहुंचा जा सके. यह 60 दिनों की समयसीमा 17 अगस्त को खत्म हो गई. हालांकि, हाल में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और टकराव के बाद इन बातचीत का आगे क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है.
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एवाई/पीएम