पत्रकार पर एफआईआर क्यों? कर्नाटक भाजपा ने सरकार से मांगा जवाब

Bengaluru, 18 सितंबर . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने Friday को गणेश विसर्जन जुलूस को लेकर टी. नरसीपुर Police निरीक्षक द्वारा की गई विवादित टिप्पणी को रिकॉर्ड कर उसकी रिपोर्टिंग करने वाले एक पत्रकार के खिलाफ First Information Report दर्ज किए जाने पर राज्य Government की आलोचना की.

आर. अशोक ने कहा कि पत्रकारों का काम तथ्यों को सामने लाना है और विवादित बयान की रिपोर्टिंग करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है. उन्होंने राज्य Government से इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने और पत्रकार के खिलाफ दर्ज First Information Report को वापस लेने की मांग की.

यह मामला गणेश जुलूस को लेकर Police अधिकारी की कथित विवादास्पद टिप्पणी के सामने आने के बाद शुरू हुआ, जिसके वीडियो को रिकॉर्ड और प्रकाशित करने वाले पत्रकार के खिलाफ Police ने मामला दर्ज कर लिया. भाजपा ने इस कार्रवाई को पत्रकारों को डराने और सच दबाने की कोशिश करार दिया है.

आर. अशोक ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर कांग्रेस Government की उस सोच को उजागर किया है, जिसे उन्होंने “संविधान विरोधी और हिंदू विरोधी” बताया. उन्होंने कहा कि एक स्थानीय मीडिया प्रतिनिधि को शांति बैठक की रिपोर्टिंग के लिए Police स्टेशन बुलाया गया था. इसके बाद बैठक का वीडियो प्रसारित किया गया.

अशोक ने सवाल किया, “अब उस पत्रकार के खिलाफ First Information Report दर्ज कर दी गई, जिसने वीडियो बनाया था. यह कैसा न्याय है?” उन्होंने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से इस पर जवाब मांगा.

आर. अशोक ने सवाल किया कि जब कांग्रेस Government ने Police अधिकारी के बयान को सही और कानूनी बताया है, तो पत्रकार के खिलाफ First Information Report किस आधार पर दर्ज की गई.

उन्होंने कहा, “पत्रकार ने बैठक में कही गई बातों को रिकॉर्ड किया और प्रसारित किया. अगर Police अधिकारी का बयान सही और कानूनी था, तो उसे रिपोर्ट करने वाले पत्रकार के खिलाफ First Information Report किस आधार पर दर्ज की गई?”

उन्होंने आरोप लगाया कि First Information Report दर्ज करना मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश है. साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या पत्रकार Governmentी अधिकारियों के बयानों की स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग कर सकते हैं.

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह केवल एक पत्रकार का मामला नहीं है. यह संविधान से मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल है. मीडिया की आजादी कहां है? सवाल पूछने का अधिकार कहां है? Government के कामकाज की रिपोर्टिंग करने की आजादी कहां है? क्या यह आपातकाल के दौर जैसी स्थिति है?”

भाजपा नेता ने गणेश उत्सव को लेकर Government के रवैये की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुओं पर अपने त्योहार मनाने के लिए पाबंदियां लगाई जा रही हैं.

उन्होंने सवाल किया कि क्या लोगों को अपने त्योहार मनाने के लिए Government, अधिकारियों और Police से कई तरह की अनुमतियां लेनी पड़ेंगी.

अशोक ने पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र से जुड़े हालिया विवाद का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी, तब कांग्रेस Government ने जाति से जुड़े मुद्दे उठाए थे.

उन्होंने मौजूदा मामले में एक दलित पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठाया.

अशोक ने कहा, “दलितों के नाम पर Political फायदा उठाने की कोशिश करने वाली कांग्रेस को क्या एक दलित पत्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दिखाई नहीं देती?”अगर मीडिया की स्वतंत्रता प्रभावित होती है या First Information Report के जरिए सवाल उठाने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती है, तो वह पत्रकारों के साथ खड़े रहेंगे.

Chief Minister डी.के. शिवकुमार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए. अगर पत्रकार ने कोई अपराध किया है तो कानून के अनुसार उसकी जांच होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “लेकिन किसी अधिकारी के बयान को केवल रिकॉर्ड करने और उसकी खबर दिखाने के लिए पत्रकार को आरोपी बनाना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है.”

अशोक ने मांग की कि राज्य Government इस मामले की पारदर्शी जांच कराए और सार्वजनिक रूप से बताए कि पत्रकार के खिलाफ First Information Report किस आधार पर दर्ज की गई.

यह विवाद टी नरसीपुर के इंस्पेक्टर धनंजय द्वारा गणेशोत्सव आयोजकों के साथ एक शांति बैठक के दौरान दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ.

वीडियो में इंस्पेक्टर ने आयोजकों से मंजूर किए गए रास्ते से ही जुलूस निकालने को कहा था. उन्होंने जुलूस को मस्जिद के पास ले जाने और वहां पटाखे फोड़ने के खिलाफ भी चेतावनी दी थी.

Police अधिकारियों का कहना है कि जुलूस के पारंपरिक रास्ते खुले हैं और आयोजकों से केवल जुलूस के रास्ते की जानकारी अधिकारियों को देने तथा सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था.

विवाद के बाद नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने टी नरसीपुर Police स्टेशन के सामने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद कांग्रेस Government ने शहर में मस्जिद के सामने से गणेश जुलूस निकालने की अनुमति दे दी.

एएमटी/वीसी

Leave a Comment