पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर विवाद, दलजीत चीमा ने भगवंत मान पर साधा निशाना

चंडीगढ़, 6 सितंबर . शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब एवं Haryana हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी मिश्रा की नियुक्ति पर Chief Minister भगवंत मान द्वारा उठाई गई आपत्तियों की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि न्यायिक नियुक्तियों पर कार्यपालिका की ओर से सवाल उठाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को कमजोर करने वाला कदम है.

डॉ. चीमा ने Saturday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि Chief Minister भगवंत मान की टिप्पणियां बेहद चिंताजनक हैं और उनकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यपालिका यदि न्यायिक नियुक्तियों को प्रभावित करने या उन पर सवाल खड़े करने का प्रयास करती है, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर खतरा है.

अकाली नेता ने कहा कि पंजाब एवं Haryana हाईकोर्ट ने हाल के समय में पंजाब Government के खिलाफ कई महत्वपूर्ण और सख्त फैसले दिए हैं. वहीं, राज्य के सर्वोच्च पदों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई भी अहम चरण में पहुंच रही है. ऐसे समय में न्यायपालिका को लेकर विवाद खड़ा करना Government की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

डॉ. चीमा ने Chief Minister भगवंत मान से यह भी पूछा कि वह पहले यह जवाब दें कि पंजाब की निर्वाचित Government को उन्होंने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान के अधीन क्यों कर दिया है. उनका आरोप है कि राज्य के कई महत्वपूर्ण फैसले और नियुक्तियां दिल्ली से प्रभावित होकर की जा रही हैं.

उन्होंने कहा कि जब पंजाब की प्रशासनिक स्वायत्तता ही दिल्ली के हवाले कर दी गई है, तब Chief Minister भगवंत मान को संघवाद पर किसी को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

डॉ. चीमा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल हमेशा न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के पक्ष में खड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी न्यायपालिका को कमजोर करने, डराने या उसमें किसी भी तरह के Political हस्तक्षेप की हर कोशिश का मजबूती से विरोध करेगी.

डीएससी

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