नागालैंड: एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर असम राइफल्स का स्पष्टीकरण, ‘सीमा पार करने के लिए जरूरी अनुमति नहीं थी’

कोहिमा, 20 सितंबर . नागालैंड के मेलुरी जिले के अवांगखु में नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाने से रोके जाने के मामले में असम राइफल्स ने स्पष्टीकरण जारी किया है. असम राइफल्स के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल को उसकी पहचान या प्रस्तावित यात्रा के उद्देश्य के कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के लिए आवश्यक वैध अनुमति और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रोका गया.

असम राइफल्स ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाते समय अवांगखु में रोक दिया गया. बल का कहना है कि इस मामले को नागा पहचान या लोगों के बीच सांस्कृतिक संपर्क से जोड़ने के बजाय निर्धारित सीमा नियमों और आवश्यक दस्तावेजों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

असम राइफल्स द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, 19 सितंबर को सुबह करीब 11:30 बजे आठ लोग तीन वाहनों में निर्धारित सीमा पारगमन स्थल पर पहुंचे थे. प्रतिनिधिमंडल ने म्यांमार के त्सेरा जाने के लिए भारत-म्यांमार सीमा पार करने की इच्छा जताई थी.

स्पष्टीकरण में कहा गया है कि सीमा पार करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर प्रतिनिधिमंडल सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध बॉर्डर पास या अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका. इसी आधार पर प्रतिनिधिमंडल को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई.

असम राइफल्स ने कहा कि यह मामला सांस्कृतिक संबंधों या लोगों के बीच संपर्क को रोकने का नहीं, बल्कि सीमा पार आवाजाही के लिए लागू नियमों के अनुपालन का है.

आधिकारिक बयान में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि social media और कुछ मीडिया मंचों पर इस घटना को नागा पहचान से जोड़कर पेश किया जा रहा है. असम राइफल्स का कहना है कि सीमा नियमन से जुड़े एक विशिष्ट मामले को समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के व्यापक मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है.

बल ने दोहराया कि भारत-म्यांमार सीमा पर आवाजाही इस संबंध में निर्धारित Governmentी नीति और शर्तों के अधीन है.

असम राइफल्स के स्पष्टीकरण में कहा गया कि मौजूदा विनियमित आवाजाही व्यवस्था के तहत निर्धारित सीमा पारगमन स्थलों से आवाजाही के लिए पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें लागू होती हैं.

आधिकारिक संचार में उद्धृत प्रावधानों के अनुसार, फ्री मूवमेंट रिजीम की सुविधा भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित पात्र गांवों के लिए लागू होती है.

बयान के अनुसार, एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल नागालैंड की राजधानी कोहिमा से आया था. ऐसे में केवल प्रस्तावित सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम या किसी संगठन के संदर्भ पत्र के आधार पर प्रतिनिधिमंडल को स्वतः अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का अधिकार नहीं मिलता.

असम राइफल्स ने स्पष्ट किया कि किसी नागरिक संगठन द्वारा जारी रेफरेंस लेटर या सिफारिश पत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की वैध अनुमति का विकल्प नहीं है.

असम राइफल्स ने अपने पक्ष के समर्थन में सीमा पार आवाजाही के आंकड़े भी साझा किए हैं. आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, संबंधित व्यवस्था के तहत अब तक 16,428 बॉर्डर पास जारी किए जा चुके हैं.

बल का कहना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि निर्धारित शर्तों और दस्तावेजी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले लोगों की सीमा पार आवाजाही को नियमानुसार सुगम बनाया जा रहा है.

असम राइफल्स ने मीडिया संस्थानों से संवेदनशील सीमा संबंधी मामलों में खबर प्रकाशित करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारियों से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है.

बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने जैसे संवेदनशील विषयों पर अधूरी या अपुष्ट जानकारी प्रकाशित करने से पहले उचित सावधानी बरती जानी चाहिए और खबरों में इस विषय पर लागू Governmentी नीतियों तथा नियमों का संदर्भ भी शामिल किया जाना चाहिए.

एएमटी/डीकेपी

Leave a Comment