
रांची, 6 सितंबर . Jharkhand Government के कैबिनेट मंत्री और Jharkhand मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के Saturday देर रात आकस्मिक निधन के साथ राज्य की राजनीति में एक असामान्य और दुखद संयोग जुड़ गया है. पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों में Jharkhand Government के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों जगन्नाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो चुका है.
सुदिव्य कुमार सोनू का Saturday देर रात गिरिडीह में निधन हुआ. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, गिरिडीह के हरसिंगरायडीह स्थित आवास पर वह देर रात सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. उन्हें छाती में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद परिजन तत्काल उन्हें गिरिडीह के मर्सी हॉस्पिटल ले गए. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. बताया गया है कि उन्हें हार्ट अटैक आया था.
सुदिव्य कुमार सोनू राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य तथा नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी भी थी. इके पहले Jharkhand की हेमंत सोरेन Government के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान निधन हुआ था. कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था और उनका फेफड़ा प्रत्यारोपण भी किया गया था. वह डुमरी विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए थे और झामुमो के कद्दावर नेताओं में शामिल थे.
2024 में जब हेमंत सोरेन के नेतृत्व राज्य में लगातार दूसरा बार झामुमो के नेतृत्व में Government बनी तो शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी रामदास सोरेन को दी गई थी. झामुमो के वरिष्ठ नेता और घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन का 15 अगस्त 2025 को निधन हो गया था. इस तरह अप्रैल 2023 से सितंबर 2026 के बीच करीब तीन वर्ष पांच महीने के अंतराल में Jharkhand Government के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो चुका है.
तीनों ही नेता Jharkhand मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहे और राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से जुड़े थे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग संभाल रहे थे. सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से न केवल झामुमो बल्कि Jharkhand Government को भी बड़ा झटका लगा है.
वह Chief Minister हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में माने जाते थे और Government की नीतियों तथा अपने विभागों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से रखते थे. हाल के छात्र आंदोलन के दौरान भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी. लगातार तीन शिक्षा मंत्रियों के निधन का यह संयोग Jharkhand की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहेगा.
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एसएनसी/एएस