‘दिल के अरमान आंसुओं में बह गए’, डूसू चुनाव नतीजों से उत्साहित भाजपा का विपक्ष पर तंज

New Delhi, 20 सितंबर . दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डीयूएसयू) चुनाव के नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी में उत्साह का माहौल है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने चार में से तीन अहम सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसे भाजपा Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में युवाओं के भरोसे के तौर पर देख रही है. वहीं परिणामों को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला भी बोला है.

श्रीनगर में BJP MP सत शर्मा ने डीयूएसयू नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देश में एक अच्छा बदलाव हो रहा है. लोगों को पता है कि एबीवीपी एक ऐसा छात्र संगठन है जो लगातार छात्रों के बीच रहता है, उनकी परेशानियों और मुश्किलों को सुनता है और उन्हें हल करने की कोशिश करता है. एनएसयूआई की बात करें तो हमने देखा कि कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, फिर भी उनके लोग एक भी सीट नहीं जीत पाए.”

दिल्ली में BJP MP प्रवीण खंडेलवाल ने भी नतीजों को विपक्ष के लिए करारा जवाब बताया. उन्होंने कहा, “इस नतीजे से पूरा विपक्ष बेनकाब हो गया है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन अहम सीटें जीतीं, जो साफ तौर पर दिखाता है कि देश के युवाओं और छात्रों को Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है. Prime Minister के नेतृत्व में देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है. दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां हैं जिनका एकमात्र काम अपने Political फायदे के लिए माहौल खराब करना है.”

वहीं हैदराबाद से भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर तंज कसते हुए डीयूएसयू नतीजों को जोड़ा. उन्होंने कहा, “दिल्ली में राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ सुनाई नहीं दे रही है. हमने कल डीयूएसयू चुनाव के नतीजे देख लिए हैं. बोस्टन का अल्बर्ट आइंस्टीन इंस्टीट्यूट और बेलग्रेड का कैनवस इंस्टीट्यूट—जहां से आपके छात्रों ने पढ़ाई की है और जहां आपने टूलकिट और सोरोस टूलकिट की पुरानी ट्रेनिंग ली है, वे India में काम नहीं आने वाले हैं.”

टी.आर. श्रीनिवास ने कहा, “कल दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव के नतीजे आए. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने तीन सीटें जीतीं, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार शौकीन ने वाइस प्रेसिडेंट का पद जीता. यहां गौर करने वाली बात यह है कि विपक्ष ने चाहे कितना भी शोर मचाया हो या Narendra Modi के नेतृत्व पर कितने भी सवाल उठाए हों और चाहे कितनी भी बुरी बातें कही हों, आखिर में क्या हुआ? नतीजा क्या निकला? छात्रों का भरोसा और विश्वास मोदी पर ही बना रहा. इस संदर्भ में केजरीवाल और राहुल गांधी के लिए एक बहुत पुराना गाना है ‘दिल के अरमान आंसुओं में बह गए.’ बस इसे गुनगुनाते रहिए. संक्षेप में कहें तो यही उनकी असल स्थिति है.”

पीआईएम/वीसी

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