
New Delhi, 1 सितंबर . दिल्ली की राजनीति में चावल घोटाले को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (आप) ने सीबीआई की ओर से दर्ज First Information Report का हवाला देते हुए दिल्ली Government पर सवाल उठाए हैं.
‘आप’ दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने Tuesday को आरोप लगाया कि दिल्ली के गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए आवंटित करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल गलत तरीके से दूसरी जगह भेज दिया गया.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली Government के करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से जुड़ी यह दूसरी First Information Report है. उन्होंने दावा किया कि इससे पहले दवा घोटाले को लेकर मामला सामने आया था और अब कथित चावल घोटाले में सीबीआई ने 27 अगस्त 2026 को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में First Information Report दर्ज की है.
पत्र में दावा किया गया था कि यह चावल दिल्ली में रहने वाले दिहाड़ी मजदूरों, लेबर क्लास, प्रवासी श्रमिकों और उन लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कवर नहीं होते हैं.
सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि यह पत्र कई महीने बाद, 8 अप्रैल 2026 को आगे भेजा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री ने पत्र अपने विभाग के कमिश्नर को भेजने के बजाय एडिशनल कमिश्नर को क्यों भेजा. इसके बाद एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा ने एफसीआई के महाप्रबंधक को ई-मेल भेजकर चावल के आवंटन और आपूर्ति की सुविधा देने का अनुरोध किया और एनओसी भी जारी की.
भारद्वाज ने कहा कि मामला केवल पत्र को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं था. उनके अनुसार, एफसीआई को चावल उपलब्ध कराने के लिए बाकायदा अनुरोध, प्राधिकरण और एनओसी भेजी गई. इसके बाद 4 मई 2026 को नेरमैक की ओर से मंत्री को दोबारा पत्र भेजकर बताया गया कि उसे 31,000 मीट्रिक टन चावल मिल चुका है और अतिरिक्त 31,000 मीट्रिक टन चावल की मांग की गई.
आरोप है कि इस पत्र को भी मंत्री की ओर से एडिशनल कमिश्नर को भेजा गया और फिर एफसीआई से चावल उपलब्ध कराने के लिए दोबारा पत्राचार किया गया.
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल का मामला सामने आया है. उन्होंने कहा कि यदि यह चावल वास्तव में दिल्ली के गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए था तो Government को यह बताना चाहिए कि इसे कहां और किसे वितरित किया गया.
उन्होंने सवाल उठाया कि चावल वितरण के संबंध में न तो कोई सार्वजनिक जानकारी दी गई और न ही Government की ओर से वितरण कार्यक्रम का प्रचार किया गया.
‘आप’ नेता ने विशेष रूप से एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा के कारण बताओ नोटिस के जवाब का हवाला दिया.
भारद्वाज ने कहा कि यदि अधिकारी का यह जवाब सही है तो सीबीआई को मंत्री की भूमिका की भी विस्तृत जांच करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल अधिकारियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भूमिका सामने आनी चाहिए जिन्होंने चावल के आवंटन और आपूर्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दूसरी बार मंत्री को जानकारी दी गई कि 31,000 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया जा चुका है, तो उन्होंने यह जानकारी क्यों नहीं मांगी कि चावल दिल्ली में कहां और किन लाभार्थियों को वितरित किया गया.
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गरीबों के नाम पर आवंटित चावल की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. ‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार कमिश्नर विभाग का प्रमुख होता है और एडिशनल कमिश्नर के पास इस तरह की एनओसी या प्राधिकरण जारी करने की शक्ति नहीं थी. ऐसे में बिना उचित फाइल प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के एफसीआई को पत्र भेजे जाने की जांच जरूरी है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मामले में सीबीआई से निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग करती है. उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चावल आवंटन का प्रस्ताव किसने तैयार किया, किसके निर्देश पर पत्राचार हुआ, एफसीआई से चावल किसे मिला और अंततः यह चावल कहां पहुंचा.
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पीकेटी/डीकेपी