दिल्ली घोषणा में भारत की प्राथमिकताओं की दिखी स्पष्ट झलक: विदेशी मामलों के जानकार वाइल अव्वाद

Mumbai , 13 सितंबर . ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित New Delhi घोषणा को विदेशी मामलों के जानकार वाइल अव्वाद ने ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि आपसी विरोधाभासों के बावजूद India सभी प्रतिद्वंद्वी देशों को एक मेज पर लाने में सफल रहा, जहां समृद्धि, व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई. आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने, द्विपक्षीय विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान और संयुक्त राष्ट्र के पुनर्गठन जैसे मुद्दों पर India ने अपना पक्ष मजबूती से रखा, जिसे उन्होंने India की बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया.

ब्रिक्स देशों द्वारा सर्वसम्मति से New Delhi घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाने पर विदेशी मामलों के जानकार वाइल अव्वाद ने कहा, “इसे हमेशा दिल्ली घोषणा के रूप में याद रखा जाएगा, क्योंकि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सभी विरोधाभासों और आपसी टकराव के बावजूद India सभी प्रतिद्वंद्वी पक्षों को एक मेज पर लाने और समृद्धि, आर्थिक परस्पर निर्भरता, देशों के बीच व्यापार और एक-दूसरे की मदद से जुड़े मामलों पर चर्चा करने में सफलतापूर्वक सक्षम रहा.”

उन्होंने कहा कि निष्कर्ष ये निकला कि इसमें अधिकांश वे बिंदु शामिल हैं जो India कहना चाहता था और बाकी देश भी इस पर कहना चाहते थे. इसलिए मैं इसे सभी ब्रिक्स सदस्यों के लिए एक जीत की स्थिति मानूंगा.

वाइल अव्वाद ने कहा, “India आतंकवाद के मुद्दे को चर्चा में लाने में सफल रहा और आतंकवाद-रोधी उपायों पर विचार किया जाना चाहिए और किसी को भी आतंकवाद का समर्थन नहीं करना चाहिए. दूसरा बहुत महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि India इस मुद्दे को आगे रखने में सक्षम रहा कि द्विपक्षीय मुद्दों को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के पुनर्गठन का मुद्दा भी. ये ऐसे मुद्दे हैं, जहां India अपना पक्ष रखना चाहता था.”

विदेशी मामलों के जानकार ने कहा कि इस पर व्यावहारिक और यथार्थवादी होने के लिए और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रिपोर्टिंग में निष्पक्ष होने के लिए, यह एक बहुत अच्छा घटनाक्रम है कि हम ग्लोबल साउथ के नेताओं को एक टेबल पर लाकर अपने आपसी हितों से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए देख सके. यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था और भू-Political परिदृश्यों में हो रहे बदलावों पर भी, चाहे वह रूसी-यूक्रेनी युद्ध हो, चाहे वह पश्चिम एशियाई युद्ध हो, चाहे वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अशांति हो, इन सभी को उजागर किया गया है. लेबनान, फिलिस्तीन, ईरान और हूतियों के मुद्दों में भी, सब कुछ ध्यान में लिया गया है.

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि यह न केवल एक आर्थिक शक्ति होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में यह एक Political शक्ति भी बन सकती है जिससे निPatna होगा. उन्हें और सदस्यों को अपने पाले में लाने की स्थिति में होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह समूह वास्तव में भविष्य की बहुध्रुवीय दुनिया में दक्षिण सहयोग का प्रतिनिधित्व करे.

केके/वीसी

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