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Wednesday, 4 November 2026
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दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-II जारी, हवा खराब होते ही क्यों लागू होता है यह प्लान, जानें किन चीजों पर लगी हैं पाबंदी

दिल्ली एनसीआर में ग्रैप II जारी, हवा खराब होते ही क्यों लागू होता है यह प्लान, जानें किन चीजों पर लगी हैं पाबंदी

दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-II जारी, हवा खराब होते ही क्यों लागू होता है यह प्लान, जानें किन चीजों पर लगी हैं पाबंदी

New Delhi, 4 नवंबर . दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 2 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से ग्रैप के चरण-II को लागू कर दिया.

वहीं, Wednesday को नोएडा का एक्यूआई 600 से ज्यादा दर्ज किया गया है, जो सबसे गंभीर और सबसे खराब श्रेणी में आता है. सीएक्यूएम ने नागरिकों से अपील की कि वे ग्रैप के चरण-I और चरण-II के नागरिक चार्टर में बताए गए निर्देशों का पालन करें. ग्रैप के चरण-II के तहत एजेंसियों को कई सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. ऐसे में हम बात करेंगे कि इसमें कौन-कौन सी पाबंदियां होती हैं?

ग्रैप यानी ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक आपातकालीन कार्य योजना है. आसान भाषा में कहें तो यह प्रदूषण के स्तर के आधार पर लागू होने वाले कड़े नियमों का एक सेट है. हवा जितनी खराब होगी, पाबंदियां उतनी ही सख्त होती जाएंगी. इसे पहली बार 2017 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया था.

वर्तमान में ग्रैप को लागू करने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की है. सीएक्यूएम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमानों और वायु गुणवत्ता के आंकड़ों की लगातार निगरानी करता है. जब एक्यूआई एक निश्चित स्तर को पार कर जाता है या मौसम विभाग पूर्वानुमान जताता है कि अगले कुछ दिनों में हवा बेहद खराब होने वाली है, तो सीएक्यूएम ग्रैप के संबंधित चरण को लागू करने का आदेश दे देता है.

पहला चरण ‘खराब’ हवा के लिए जाना जाता है. इसमें एक्यूआई 201 से 300 के बीच होता है. जब हवा खराब होने लगती है तो यह चरण लागू होता है. इसमें निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण के सख्त नियम लागू होते हैं. खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह से रोक होती है. सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू हो जाता है और 10-15 साल पुराने वाहनों पर सख्ती बढ़ा दी जाती है. Government लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील करती है.

दूसरा चरण ‘बहुत खराब’ हवा के लिए जाना जाता है. इसमें एक्यूआई 301 से 400 के बीच होता है. इस चरण में डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक लग जाती है, हालांकि आवश्यक सेवाओं को छूट दी जाती है. लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें, इसके लिए पार्किंग शुल्क बढ़ा दिया जाता है. सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों तथा मेट्रो के फेरे बढ़ा दिए जाते हैं. तंदूर और कोयले वाले होटलों और ढाबों पर रोक लग जाती है.

तीसरा चरण ‘गंभीर’ हवा के लिए जाना जाता है. इसमें एक्यूआई 401 से 450 के बीच होता है. यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है. राष्ट्रीय सुरक्षा और जरूरी प्रोजेक्ट्स को छोड़कर सभी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पूरी तरह बैन लग जाता है. दिल्ली-एनसीआर में बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल वाले चार पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लग जाता है. इसमें प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फैसला भी लिया जाता है.

चौथा चरण ‘बेहद गंभीर या आपातकाल’ की स्थिति के लिए जाना जाता है. इसमें एक्यूआई 450 से ऊपर चला जाता है. यह सबसे चरम स्थिति है. दिल्ली में आवश्यक सामग्री ले जाने वाले ट्रकों को छोड़कर अन्य सभी ट्रकों की एंट्री बैन हो जाती है. स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए जाते हैं और ऑनलाइन क्लासेज चलती हैं. Governmentी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया जा सकता है. इसमें Government ऑड-ईवन जैसी योजनाएं भी लागू कर सकती है.

दिल्ली ट्रैफिक Police ने ग्रैप चरण-II के तहत वाहन प्रतिबंधों का पालन करने और जिम्मेदारी से वाहन चलाने की अपील की है. दिल्ली में ग्रैप चरण-दो के तहत वाहनों को लेकर ट्रैफिक Police ने नियम जारी किए हैं. इन नियमों में साफ किया गया है कि किन वाहनों को चलने की अनुमति होगी और किन वाहनों पर रोक रहेगी.

अनुमति वाले वाहनों में दिल्ली में रजिस्टर्ड पेट्रोल-डीजल कारें शामिल हैं जो बीएस-IV और उससे ऊपर की हैं और जिनके पास वैध पीयूसी है, उन्हीं वाहनों को चलने की अनुमति है. इसके अलावा ईवी या सीएनजी वाहन भी चल सकते हैं. इंट्रा-स्टेट और इंटर-सिटी बसों में इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-VI डीजल वाली बसें चल सकती हैं. कमर्शियल वाहनों में एलसीवी, एमसीवी और एचसीवी, जो बीएस-VI, सीएनजी या इलेक्ट्रिक हैं और जिनके पास वैध पीयूसी है, उन्हें अनुमति दी गई है. इमरजेंसी सेवाओं के वाहनों में एंबुलेंस, फायर और Police वाहन शामिल हैं.

वहीं रोक वाले वाहनों में दिल्ली में रजिस्टर्ड पेट्रोल-डीजल कारें जो बीएस-III और उससे नीचे की हैं, उन पर रोक लगाई गई है. दिल्ली के बाहर की पेट्रोल-डीजल कारें जो बीएस-IV और उससे नीचे की हैं, उन पर भी रोक है. बीएस-IV डीजल और उससे पुरानी इंट्रा-सिटी और इंटर-सिटी बसों पर भी रोक है. बीएस-IV और उससे पुराने कमर्शियल वाहनों पर भी रोक लगाई गई है. भारी ट्रक जो दिल्ली के लिए नहीं हैं, वे पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से डायवर्ट हो सकते हैं. इसके साथ ही कोई भी वाहन जिसके पास वैध पीयूसी नहीं है, उस पर भी रोक रहेगी.

एडवाइजरी में कहा गया है कि अपने वाहन को अच्छी तरह से मेंटेन रखें. वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) साथ रखें. अनावश्यक आइडलिंग और अत्यधिक वाहन उपयोग से बचें. कचरा या अन्य सामग्री जलाकर प्रदूषण फैलाने से बचें. जहां संभव हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट/कारपूल को प्राथमिकता दें.

यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली ट्रैफिक Police की ट्रैफिक एडवाइजरी में नियोजित डायवर्जन और ट्रैफिक अपडेट की जांच करें.

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वीकेयू/एबीएम

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