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Tuesday, 3 November 2026
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त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर रोक की मांग, Supreme Court का केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस

त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरना प्रदर्शन पर रोक की मांग, Supreme Court का केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस

त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर रोक की मांग, Supreme Court का केंद्र, दिल्ली Government और Police को नोटिस

New Delhi, 3 नवंबर . दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने केंद्र, दिल्ली Government और दिल्ली Police को नोटिस जारी किया है. याचिका में त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई है.

व्यापारियों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि धरना प्रदर्शन और रैली की वजह से 2 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है.

वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज हम जंतर-मंतर, रामलीला मैदान आदि से लगभग 80 साल आगे आ चुके हैं. रामलीला मैदान कनॉट प्लेस (सीपी) से 1 मील दूर है. एक तरफ अस्पताल है. उस इलाके में 50 लाख लोग रहते हैं. अब हमें किसी योजना के बारे में सोचना होगा. यह अब इधर-उधर जंतर-मंतर लगाने जैसा नहीं रह गया है.

वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज सभी दुकानें बंद हैं, सीपी में कोई नहीं है. अगर त्योहारों के सीजन में बिक्री न हो तो व्यापारियों की आमदनी गिर जाती है. मेरी गुजारिश है कि कुछ अलग हटकर समाधान खोजना चाहिए. इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विरोध प्रदर्शन किया था.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी ‘बंद’ का आह्वान करता है, उसे जिम्मेदारी लेनी होगी. इस पर विपक्ष के वकील हरिहरन ने कहा कि यह एक अधिसूचित जगह है. अब उन्हें इससे भी दिक्कत है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है, आप उन सभी को पक्षकार बनाएं. उनके जवाब के बिना कोई भी अदालत फैसला नहीं कर सकती. अनुमति देने वाले आदेश में यह साफ होना चाहिए कि अनुमति क्यों दी जा रही है या क्यों नहीं दी जा रही है. आप दूसरों को यह कहकर नहीं रोक सकते कि ‘मैं अभी विरोध-प्रदर्शन कर रहा हूं, इसलिए आप ऐसा नहीं कर सकते.’

तुषार मेहता ने कहा कि सीजेपी को अनुमति सिर्फ 1 दिन के लिए थी लेकिन उन्होंने 17 दिनों तक उस जगह पर कब्जा जमाए रखा. वे संसद की ओर मार्च कर गए. बिना अनुमति के उन्हें संसद या Supreme Court तक जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती थी.

व्यापारियों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने मांग की कि अगले 2 महीनों तक कोई विरोध-प्रदर्शन या धरना नहीं होना चाहिए. व्यापारियों का काफी नुकसान हो रहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकीलों के बहस के तरीके पर नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि आप दूसरे की बात पूरी होने के बाद अपनी बात नहीं रख सकते. कोर्ट को ‘फिश मार्केट’ न बनाएं. सीजीआई ने कहा कि कोई भी वर्ग डेजिग्नेटिड प्रोटेस्ट साइट पर हमेशा के लिए नहीं बैठ सकता, वहां पर प्रदर्शन का सबको अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि मान लीजिए किसान भी विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं तो वह कहां जाएंगे.

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ओपी/पीएम

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