
हैदराबाद, 6 सितंबर . तेलंगाना में विधानसभा सत्र से पहले सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन पर विपक्षी पार्टी India राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने कहा कि रेवंत रेड्डी और कांग्रेस पार्टी के नेता अपने शासन के 100 दिनों की नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
बीआरएस के प्रवक्ता दिनेश चौधरी ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “रेवंत रेड्डी और कांग्रेस पार्टी आज केसीआर गारू के खिलाफ धरना दे रहे हैं. यह दिखाता है कि कांग्रेस के 100 दिनों के शासन के बाद उनके पास दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है और यह उनकी बौद्धिक दिवालियापन को भी दर्शाता है.”
उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों की अपनी रणनीतियां होती हैं और वे तेलंगाना के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपने हितों के अनुसार काम करती हैं. Government को क्या कदम उठाने चाहिए और उन पर दबाव कैसे बनाया जाए, यह भी महत्वपूर्ण है. लेकिन रेवंत रेड्डी, उनके मंत्रियों का समूह और कांग्रेस पार्टी के नेता अपने शासन के 100 दिनों की नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. यह खुद दिखाता है कि उनमें प्रगति या विकास के मामले में दिखाने के लिए विजन की कितनी कमी है.
दिनेश चौधरी ने कहा, “हम रेवंत रेड्डी से कहना चाहते हैं कि इस तरह की सस्ती चालों और हथकंडों का सहारा लेने के बजाय कृपया उन वादों पर ध्यान दें, जो आपने लोगों से किए हैं और तेलंगाना के विभिन्न वर्गों को जो आश्वासन दिए हैं. कम से कम आपने जो वादा किया है, उसका 10 प्रतिशत तो पूरा करने की कोशिश करें. नहीं तो, इस तरह की ध्यान भटकाने वाली चालें आपको या आपकी Government को जनता के गुस्से या लोगों के समर्थन में हमारे कड़े कदमों से नहीं बचा पाएंगी.”
वहीं, तेलंगाना राष्ट्र सेना (टीआरएस) की प्रमुख कलवकुंतला कविता ने से कहा, “तेलंगाना में कल से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष एक-दूसरे से Political टकराव में उलझे हुए हैं, जिससे जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटक रहा है.”
उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि Government तेलंगाना के संघर्ष में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों से किए गए सभी वादे पूरे करे. इन मुद्दों का समाधान तय समय-सीमा के भीतर और जल्द से जल्द किया जाना चाहिए. साथ ही, फीस रिइम्बर्समेंट और फीस रेगुलेशन बिल (जो अभी लंबित है) के मुद्दे पर भी चर्चा होनी चाहिए. विधानसभा सत्र में इन सभी जन-मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए.”
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डीसीएच/