तीन अग्निवीरों का सर्वोच्च बलिदान, सेना ने जताई गहरी संवेदना

New Delhi, 27 सितंबर . अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम दिबांग क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय सेना के तीन अग्निवीरों ने कर्तव्य की राह में सर्वोच्च बलिदान दिया. अग्निवीर आदित्य कुमार, अग्निवीर कुंदन कुमार और अग्निवीर विनोद यादव के निधन से सेना में शोक की लहर है.

पूर्वी सेना कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी. कृष्णन और सभी सैन्य रैंकों ने तीनों जवानों के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है. सेना ने कहा कि तीनों अग्निवीरों ने कर्तव्य निभाते हुए वीरतापूर्वक सर्वोच्च बलिदान दिया. भारतीय सेना ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा है कि दुख की इस घड़ी में सेना उनके साथ मजबूती से खड़ी है.

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वैली में 14 अगस्त को आई बाढ़ के दौरान लापता हुए औरैया के मूल निवासी अग्निवीर विनोद यादव, बिहार के कुंदन कुमार व अग्निवीर आदित्य कुमार लापता हो गए थे. हादसे के कई दिन बाद अब डीएनए जांच के जरिए इनकी पहचान हुई. Saturday को सेना के जवानों के अस्थि कलश उनके गांव पहुंचे.

विनोद यादव उन जवानों में शामिल थे, जो अरुणाचल प्रदेश के बेहद दुर्गम क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात थे. प्राकृतिक आपदा के बीच उनका लापता होना परिवार के लिए लंबे इंतजार और अनिश्चितता का कारण बना रहा. डीएनए जांच से पहचान होने के बाद परिवार को उनके अंतिम अवशेष सौंपे गए. दिबांग वैली में बादल फटने के बाद भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी. इसी दौरान वैशाली के अग्निवीर आदित्य कुमार लापता हो गए थे. खोज अभियान के दौरान उनका पार्थिव शरीर मलबे से बरामद किया गया. अरुणाचल प्रदेश में ही पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.

इसके बाद Saturday को उनका अस्थि कलश पैतृक गांव पहुंचा. गांव में लोगों ने तिरंगा यात्रा निकालकर उन्हें अंतिम विदाई दी. इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और ग्रामीणों ने नम आंखों से वीर जवान को श्रद्धांजलि दी. दिबांग क्षेत्र अपनी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है. ऐसे चुनौतीपूर्ण इलाके में भारतीय सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए लगातार तैनात रहते हैं. बाढ़, भूस्खलन और कठिन मौसम जैसी परिस्थितियों के बीच ड्यूटी करना भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है. आदित्य कुमार, कुंदन कुमार और विनोद यादव का बलिदान इसी कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाता है. सेना ने तीनों अग्निवीरों के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान के साथ याद किया है और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है.

मानसून के दौरान असम, अरुणाचल प्रदेश, Gujarat, Himachal Pradesh, जम्मू-कश्मीर, केरल, मिजोरम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी वर्षा और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया था. कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हुआ. कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में भी लोगों की जान गई और अनेक लोग घायल हुए. प्राकृतिक आपदाओं का असर केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं रहा. मकानों, फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा. सड़कों और पुलों के साथ बिजली तथा संचार जैसी आवश्यक सेवाएं भी कई स्थानों पर प्रभावित हुईं. वनस्पति और वन्यजीवों पर भी इन आपदाओं का प्रतिकूल असर पड़ा. ऐसे कठिन हालात में दिबांग जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात तीन अग्निवीरों का सर्वोच्च बलिदान उनके कर्तव्य और देश के प्रति समर्पण की गहरी मिसाल है. भारतीय सेना ने शोक की इस घड़ी में उनके परिवारों के साथ खड़े रहने का संकल्प दोहराया है.

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जीसीबी/वीकेयू

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