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Thursday, 5 November 2026
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तिरुपति लड्डू मिलावट मामला: Supreme Court ने आंध्र प्रदेश से बाहर ट्रायल कराने की मांग ठुकराई

तिरुपति लड्डू मिलावट मामला: Supreme Court ने आंध्र प्रदेश से बाहर ट्रायल कराने की मांग ठुकराई

New Delhi, 5 नवंबर . Supreme Court ने Thursday को तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में कथित मिलावट के मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके चलते मुकदमे को दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की जरूरत हो.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने माचिंद्र शांताराम लांके और मेसर्स मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स की ओर से दाखिल आपराधिक स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आंध्र प्रदेश के Chief Minister चंद्रबाबू नायडू और उपChief Minister पवन कल्याण लगातार इस मामले पर Political बयान दे रहे हैं. इससे अभियोजन की निष्पक्षता को लेकर चिंता पैदा हो रही है.

दवे ने अदालत से कहा कि अभियोजन निष्पक्ष होना चाहिए. उन्होंने मामले को पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए दलील दी कि वहां इस मामले को लेकर वैसी भावनात्मक स्थिति नहीं होगी. इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि Supreme Court अपने पिछले आदेश से पहले ही सभी को चुप करा चुका है. पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई समस्या सामने आती है तो याचिकाकर्ता दोबारा Supreme Court का रुख कर सकते हैं. हालांकि, अदालत ने फिलहाल सुनवाई को आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग खारिज कर दी.

यह मामला तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाने वाले लड्डुओं को तैयार करने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के आरोपों से जुड़ा है. सितंबर 2024 में यह विवाद तब शुरू हुआ था, जब आंध्र प्रदेश के Chief Minister चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि पिछली वाईएसआरसीपी Government के कार्यकाल में मंदिर के लड्डुओं को बनाने में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था.

30 सितंबर 2024 को Supreme Court ने जांच जारी रहने के दौरान इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने को लेकर Chief Minister चंद्रबाबू नायडू को फटकार लगाई थी. अदालत ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि भगवान को राजनीति से दूर रखा जाएगा. इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को Supreme Court ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक की निगरानी में एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंप दी थी. सीबीआई के नेतृत्व वाली एसआईटी ने जांच पूरी करने के बाद 23 जनवरी 2026 को नेल्लोर की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया था.

आरोपपत्र में करनाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की जांच रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया था. संस्थान ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की ओर से जुलाई 2024 में टैंकरों से लिए गए घी के चार सीलबंद नमूनों का विश्लेषण किया था. प्रयोगशाला की रिपोर्ट में नमूनों में लार्ड यानी सूअर की चर्बी या अन्य पशु वसा की मौजूदगी नहीं पाई गई थी. हालांकि, जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि घी में वनस्पति तेलों और प्रयोगशाला में तैयार किए गए एस्टर के मिश्रण से मिलावट की गई थी. आरोप है कि इस मिश्रण को इस तरह तैयार किया गया था कि वह डेयरी उत्पादों के रासायनिक मानकों जैसा दिखाई दे.

इस बीच, Enforcement Directorate (ईडी) ने भी मामले से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है. मार्च 2026 में चंद्रबाबू नायडू ने कथित तौर पर पिछली Government पर फिर से आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि पिछली Government ने मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की और सीबीआई के नेतृत्व वाली एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर झूठा प्रचार किया.

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डीएससी

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