डूसू चुनाव में एबीवीपी ने जीते 3 पद, भाजपा नेता बोले- विपक्ष के अभियान को मिला जवाब

New Delhi, 19 सितंबर . दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की है. एबीवीपी के यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी हुए. दूसरी तरफ, कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई कोई पद नहीं जीत सकी.

चुनाव परिणाम आने के बाद Union Minister किरेन रिजिजू ने एबीवीपी की जीत पर बधाई दी और इसे युवाओं के बीच Political रुझान का संकेत बताया. उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ते हैं और डूसू को व्यापक छात्र प्रतिनिधित्व के मंच के तौर पर देखा जाता है. दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी की जीत को वह महत्वपूर्ण मानते हैं.

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से युवाओं और छात्रों के नाम पर चलाए जा रहे Political अभियान को डूसू के नतीजों से जवाब मिला है. उन्होंने एबीवीपी के सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का भी अभिनंदन किया.

रिजिजू ने कहा कि चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि छात्रों ने अपने विचार और Political पसंद को मतदान के माध्यम से सामने रखा है. एनएसयूआई के किसी भी पद पर जीत दर्ज नहीं कर पाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए Political संदेश बताया.

Lucknow में भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी एबीवीपी की जीत पर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि छात्रों ने राष्ट्रवाद और विकसित India की सोच के समर्थन में अपना मत दिया है. जो लोग यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे थे कि देश का युवा राष्ट्रवाद या विकसित India के विचार का समर्थन नहीं करता, उन्हें डूसू के परिणामों से जवाब मिला है.

एनएसयूआई की हार को लेकर त्रिपाठी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक राहुल गांधी कांग्रेस के नेतृत्व में प्रभावी भूमिका में रहेंगे, तब तक पार्टी को इसी तरह के चुनावी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी एजेंसियों के प्रभाव में काम करने का भी आरोप लगाया.

वहीं, Samajwadi Party के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि समाजवादी छात्र सभा ने पहली बार डूसू चुनाव में हिस्सा लिया और उसके उम्मीदवारों का प्रदर्शन अच्छा रहा. उन्होंने उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों पर रोक का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि यदि दिल्ली में छात्रसंघ चुनाव हो सकते हैं तो उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? मेहरोत्रा ने अपने Lucknow विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां छात्रसंघ चुनाव फिलहाल नहीं हो रहे हैं.

पूर्व Union Minister और गांधी स्मृति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने एबीवीपी के उम्मीदवारों को जीत की बधाई दी. उन्होंने कहा कि उन्होंने डूसू चुनाव को करीब से देखा है और परिणामों ने युवाओं से जुड़े कुछ Political दावों को चुनौती दी है. गोयल ने छात्र राजनीति में जेनजी से जुड़े विमर्श का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि social media या अन्य Political अभियानों की व्याख्या को सीधे छात्र मतदाताओं के फैसले से जोड़ना उचित नहीं होगा.

पीएसके/एबीएम

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