ट्रंप के ‘हंसी का विषय’ वाला तंज और ईयू में एसोसिएट सदस्यता का नया प्रयोग, कनाडा पहला दावेदार

वाशिंगटन, 17 सितंबर . अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को यूरोपीय संघ (ईयू) का एसोसिएट सदस्य बनाने के प्रस्ताव पर तंज कसा है. उन्होंने इसे ‘हंसी का विषय’ बताया. ट्रंप की इस टिप्पणी के पीछे ऐसा प्रयोग है जो यूरोपीय संघ के लिए भी नया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा को ईयू का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’ बनाने की दिशा में काम करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, ईयू की संधियों में फिलहाल एसोसिएट सदस्यता नाम की कोई औपचारिक श्रेणी मौजूद नहीं है.

ट्रंप ने Wednesday को उत्तरी कैरोलिना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उन्हें कनाडा के ईयू से इस तरह जुड़ने का विचार ‘लाफेबल’ यानी हंसी का विषय लगता है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर उन्हें लगा कि कनाडा को ईयू से जोड़ने की कोशिश अमेरिका के खिलाफ किसी शत्रुतापूर्ण मंशा के साथ की जा रही है, तो वह यूरोपीय संघ पर ‘बहुत बड़ा टैरिफ’ लगा सकते हैं या उसके साथ कुछ क्षेत्रों में व्यापार रोक सकते हैं.

ट्रंप की प्रतिक्रिया के बीच सवाल यह है कि आखिर ‘एसोसिएट सदस्य’ का मतलब क्या है और कनाडा के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों बनाई जा रही है.

दरअसल, ईयू में अभी पूर्ण सदस्यता और गैर-सदस्य देशों के साथ अलग-अलग तरह के समझौते मौजूद हैं, लेकिन ‘एसोसिएट सदस्य’ की कोई स्थापित कानूनी श्रेणी नहीं है. वॉन डेर लेयेन ने Wednesday को यूरोपीय संसद में अपने वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन के दौरान पहली बार सार्वजनिक रूप से कनाडा के लिए इस नए दर्जे की दिशा में आगे बढ़ने का प्रस्ताव रखा. उस समय कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी भी संसद में मौजूद थे.

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप और कनाडा लोकतंत्र तथा कई साझा मूल्यों में विश्वास करते हैं और दोनों पक्षों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अपने संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहिए. उन्होंने कनाडा के साथ तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की बात कही.

प्रस्तावित व्यवस्था का स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है. यानी यह स्पष्ट नहीं है कि कनाडा को ईयू के साथ किस स्तर की आर्थिक या Political भागीदारी मिलेगी, क्या उसे यूरोपीय सिंगल मार्केट तक पहुंच मिलेगी, और बदले में उसे ईयू के कितने नियमों को स्वीकार करना होगा. यही वजह है कि फिलहाल ‘एसोसिएट सदस्यता’ को एक तैयार व्यवस्था के बजाय एक नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है.

पूर्ण सदस्यता से यह व्यवस्था अलग होगी. ईयू की पूर्ण सदस्यता यूरोपीय देशों के लिए है और इसके साथ मतदान अधिकार, ईयू संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और अन्य अधिकार मिलते हैं. इसके विपरीत, यूरोप के बाहर के कुछ देशों के साथ ईयू पहले से ही बेहद गहरे आर्थिक संबंध रखता है. नॉर्वे, आइसलैंड और स्विट्जरलैंड इसके उदाहरण हैं, हालांकि उनके ईयू के साथ संबंध अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं पर आधारित हैं.

कनाडा और ईयू के बीच पहले से ही व्यापक व्यापारिक संबंध हैं. दोनों के बीच सीईटीए नाम का मुक्त व्यापार समझौता भी है. ऐसे में प्रस्तावित एसोसिएट सदस्यता का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि संबंधों को रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और आर्कटिक सहयोग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक ले जाना हो सकता है.

इस पहल की पृष्ठभूमि में अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव भी महत्वपूर्ण है. ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर विवाद बढ़ा है. कनाडा के Prime Minister मार्क कार्नी ने हाल के दिनों में अमेरिका पर निर्भरता घटाने और यूरोप सहित दूसरे साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है. कार्नी ने कुछ दिन पहले कहा था कि कनाडा ईयू के साथ एक ‘विशिष्ट गठबंधन’ चाहता है, न कि पूर्ण सदस्यता.

ऐसे में वॉन डेर लेयेन का प्रस्ताव कनाडा और यूरोप के बीच संबंधों को एक नए संस्थागत ढांचे में ले जाने की संभावना खोलता है. हालांकि, अभी यह शुरुआती प्रस्ताव है और इसके लिए ईयू के सदस्य देशों के बीच सहमति तथा इसके कानूनी ढांचे पर काम जरूरी होगा.

केआर/

Leave a Comment