
रांची, 30 सितंबर . रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन के खिलाफ Wednesday को विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप तय कर दिए गए. विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में हुई कार्यवाही में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए.
आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मामले में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी. Enforcement Directorate की जांच के बाद इस मामले में कुल 17 आरोपियों को आरोपी बनाया गया है. इनमें से 16 आरोपियों के खिलाफ पहले ही अलग-अलग चरणों में आरोप तय किए जा चुके थे.
हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया शेष थी, जिसे Wednesday को पूरा किया गया. यह मामला बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है. Enforcement Directorate ने जांच के दौरान जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर तथा जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े पहलुओं की जांच की थी.
एजेंसी के आरोपों के आधार पर ही विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन की कार्यवाही चल रही है. आरोप गठन की प्रक्रिया से पहले हेमंत सोरेन की ओर से मामले में निचली अदालत की कार्यवाही रोकने की मांग को लेकर Jharkhand हाईकोर्ट का रुख किया गया था. उन्होंने विशेष पीएमएलए अदालत के 21 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए आपराधिक रिट याचिका दाखिल की थी. उनकी मांग थी कि Enforcement Directorate की जांच पूरी होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए.
Wednesday को हाईकोर्ट में भी इस याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन तत्काल राहत नहीं मिली. अदालत ने Enforcement Directorate को पूरक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और उसकी प्रति संबंधित पक्ष को उपलब्ध कराने को कहा. मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिका की विचारणीयता यानी ‘मेंटेनबिलिटी’ को लेकर भी कानूनी सवाल उठाए गए. ईडी की ओर से इस आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई. इसी बीच विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर गई है.
बड़गाईं जमीन मामले में आरोप तय होने के बाद अब अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और गवाह पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. इसके बाद बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा. मामले में आगे की सुनवाई विशेष पीएमएलए अदालत में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगी.
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एसएनसी/डीकेपी