
रांची, 16 सितंबर . Jharkhand के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Supreme Court से झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने Jharkhand हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके साथ ही उन्हें इस मामले में आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली याचिका भी खारिज हो गई.
Supreme Court में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागु की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. इससे पहले रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद Jharkhand हाईकोर्ट ने भी इस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी.
Jharkhand हाईकोर्ट के 6 मई 2026 के फैसले के अनुसार, Enforcement Directorate (ईडी) की ओर से पेश सामग्री में टेंडर आवंटन के बदले कथित कमीशन वसूली और उसमें आलमगीर आलम की कथित भूमिका से जुड़े दस्तावेज तथा बयान शामिल हैं. हाईकोर्ट ने कहा था कि डिस्चार्ज के स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं. ईडी की जांच के दौरान मई 2024 में विभिन्न ठिकानों पर हुई तलाशी में करीब 37.55 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात एजेंसी के दस्तावेजों में कही गई है.
ईडी के अनुसार, जांच में ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कथित कमीशन वसूली की व्यवस्था का पता चला था. एजेंसी ने आरोप लगाया था कि कुल टेंडर मूल्य का करीब 3.2 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था, जिसमें तत्कालीन मंत्री के लिए करीब 1.5 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित था. हाईकोर्ट के फैसले में ईडी की ओर से पेश बयानों और बरामद दस्तावेजों का भी उल्लेख है.
अदालत ने कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आलमगीर आलम की कथित भूमिका को इस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता. हालांकि, ये निष्कर्ष मुकदमे के अंतिम दोषसिद्धि का फैसला नहीं हैं, बल्कि डिस्चार्ज के चरण में प्रथमदृष्टया सामग्री के आकलन से जुड़े हैं.
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एसएनसी/पीएम