झारखंडः पुलिस से विवाद और थाने में हंगामे से जुड़े मामले में विधायक को राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

धनबाद, 14 सितंबर . Jharkhand के डुमरी क्षेत्र के विधायक और Jharkhand लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख जयराम महतो को धनबाद के बरवाअड्डा थाना परिसर में कथित तौर पर हंगामा, Police अधिकारी से अभद्र व्यवहार और Governmentी काम में बाधा डालने के आरोपों से जुड़े केस में बड़ी राहत मिली है.

धनबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने Monday को इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली. यह मामला 21 अगस्त की रात बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए विवाद से जुड़ा है. दरअसल, बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के नाम पर कथित फर्जी लेटर पैड, हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल का मामला सामने आया था. आरोप था कि इन दस्तावेजों के जरिए जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और वंशावली तैयार कराने का प्रयास किया जा रहा था.

Police ने इस मामले में जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लिया था. गणेश दास की हिरासत की जानकारी मिलने के बाद विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे थे. Police का आरोप है कि इस दौरान थाना परिसर में हंगामा किया गया और हिरासत में लिए गए गणेश दास को जबरन छुड़ाने का प्रयास हुआ.

इसी दौरान विधायक और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित बातचीत का ऑडियो social media पर वायरल हुआ था. ऑडियो में कथित तौर पर विधायक द्वारा थाना प्रभारी के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल और धमकी देने की बात सामने आई थी. हालांकि, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी. थाना प्रभारी रवि कुमार के लिखित बयान पर बरवाअड्डा थाने में जयराम महतो सहित 10 नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

आरोपियों पर Governmentी काम में बाधा डालने, Policeकर्मियों को धमकी देने, थाना परिसर में हंगामा करने और भीड़ जुटाने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया. जयराम महतो ने Police के आरोपों को खारिज करते हुए इसे Political साजिश बताया था. उनका कहना था कि वह अपने कार्यकर्ता की गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाना पहुंचे थे.

उन्होंने आरोप लगाया था कि थाना परिसर में कुछ लोगों ने उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया और हमला करने की कोशिश की. अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने Police से केस डायरी तलब की थी. Thursday को Police ने केस डायरी अदालत में पेश की, जिसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.

एसएनसी/एमएस

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