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Monday, 19 October 2026
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जिनके दिलों में नफरत उनकी वजह से फ्रांस जल रहा है: ट्रंप

जिनके दिलों में नफरत उनकी वजह से फ्रांस जल रहा है: ट्रंप

वाशिंगटन/ पेरिस, 18 अक्टूबर . अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हुई हिंसा के लिए दिलों में नफरत लेकर चल रहे लोगों को जिम्मेदार ठहराया है. Sunday को उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ‘फ्रांस जल रहा है और इसकी वजह दूसरे देश से आए लोग हैं.’

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “फ्रांस जल रहा है! बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोग जिनके दिलों में नफरत भरी है उनकी वजह से कभी महान रहा देश पूरी तरह बर्बाद हो गया है. इससे पहले की बहुत देर हो जाए, अपनी सीमाएं बंद करें और इसका नियंत्रण अपने हाथों में लें!”

इससे पहले उपPresident जेडी वेंस ने भी इसके लिए प्रवासियों को इसका जिम्मेदार ठहराया था. वेंस ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा, “पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर फ्रांस और दूसरे देशों में ‘तीसरी दुनिया’ को अपने यहां जगह दी. इन नीतियों के संभावित परिणामों को लेकर पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन संबंधित नेताओं ने उन पर ध्यान नहीं दिया.”

उन्होंने फ्रांस को एक खूबसूरत देश और वहां के लोगों को अद्भुत बताते हुए उम्मीद जताई कि देश इस स्थिति को रोकने के लिए कदम उठाएगा ताकि उसके और ऐतिहासिक स्थलों को आग से नुकसान न पहुंचे.

अमेरिकी उपPresident ने इस मुद्दे को अमेरिकी राजनीति से भी जोड़ा. उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से फ्रांस की घटनाओं पर ध्यान देने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि “अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसद भी अपने देश को इसी दिशा में ले जाना चाहते हैं.”

बता दें, Saturday को फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और Police के बीच झड़पें हुईं. हिंसक गुटों ने Governmentी इमारतों को निशाना बनाया, दुकानों में लूटपाट की और Police वाहनों पर हमले किए. लिमोज शहर के 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि मार्सेई में प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल में प्रवेश कर इमारत पर नारे लिख दिए. लियोन में पर्यटन कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया.

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, पेरिस में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया. देशभर में हुई गिरफ्तारियों की संख्या करीब 1,800 रही. अधिकारियों ने बताया कि पेरिस में प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की हृदयाघात से मौत हो गई. देशभर के करीब पांच लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया. अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर हिंसक समूहों ने सार्वजनिक संपत्ति और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया.

प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले महीने कामकाजी वर्ग के इलाकों में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षकों की कमी के खिलाफ छात्र आंदोलन से हुई थी. बाद में यह आंदोलन महंगाई, असमानता, सार्वजनिक खर्च में कटौती और Governmentी सेवाओं की गिरती गुणवत्ता के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया.

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केआर/

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