जामिया मिलिया की दीवारों पर लिखे ‘आजाद कश्मीर’ के नारों की निंदा, जेकेएसए ने कार्रवाई की मांग की

New Delhi, 24 अक्टूबर . जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने Saturday को जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों पर ‘आजाद कश्मीर’ लिखे नारों की कड़ी निंदा की. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब छात्र, स्टूडेंट यूनियन को बहाल करने और कैंपस चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. एसोसिएशन ने इस घटना की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है. साथ ही, जामिया प्रशासन और दिल्ली Police से अपील की है कि वे इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करें और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें.
जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि छात्रों की जायज लोकतांत्रिक मांगों को ऐसे नारों के जरिए दबाया या कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, जिनका छात्रों के अधिकारों, प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी पर केंद्रित आंदोलन में कोई स्थान नहीं है.
खुएहामी ने कहा, “हम India के विभाजन की वकालत करने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते हैं और हम कभी भी उन लोगों का साथ नहीं देंगे, जो देश को तोड़ने की बात करते हैं. जम्मू-कश्मीर India का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा. ऐसे भड़काऊ नारों के जरिए पूरे छात्र आंदोलन को भटकाने की कोशिश की जा रही है जिसने भी जामिया मिलिया इस्लामिया की दीवारों पर ‘आजाद कश्मीर’ लिखा है, उसकी उचित जांच के जरिए पहचान की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “जामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे आंदोलन में शामिल छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों, छात्र प्रतिनिधित्व और स्टूडेंट यूनियन की बहाली को लेकर जायज चिंताएं उठा रहे हैं. उनकी मांगों को सुना जाना चाहिए और बातचीत के जरिए उनका समाधान निकाला जाना चाहिए, न कि उन्हें खारिज किया जाना चाहिए या कमजोर किया जाना चाहिए. हम इस आंदोलन को भटकाने की किसी भी कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं, चाहे वह विभाजनकारी नारों के जरिए हो या भड़काऊ संदेशों के जरिए, जो छात्रों की वास्तविक चिंताओं से ध्यान भटकाने का काम करते हैं.”
एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि कैंपस में अनुशासन, सुरक्षा और पढ़ाई-लिखाई के लिए एक अच्छा माहौल बनाए रखने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है. एसोसिएशन ने कहा कि बिना तथ्यों की जांच किए कुछ अज्ञात लोगों द्वारा लिखे गए कथित नारों के लिए पूरे छात्र समुदाय को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा.
खुएहामी ने कहा, “इस तरह के नारों के सामने आने के बाद एक गहन जांच की जानी चाहिए. जामिया प्रशासन और दिल्ली Police को इस घटना से जुड़े हालात की जांच करनी चाहिए, उपलब्ध cctv फुटेज को देखना चाहिए और पता लगाना चाहिए कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. चूंकि पूरे कैंपस में cctv कैमरे लगे हैं, इसलिए उपलब्ध फुटेज की जांच करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि नारे किसने लिखे हैं और क्या इसमें कोई बाहरी व्यक्ति भी शामिल था.
उन्होंने कहा, “पिछले एक हफ्ते में कैंपस में बाहरी लोगों के कथित तौर पर बिना अनुमति के घुसने और वहां रुकने को लेकर चिंताएं जताई गई हैं. इन आरोपों की भी सबूतों के आधार पर जांच होनी चाहिए. जिम्मेदारी तय करने का काम निष्पक्ष जांच के जरिए होना चाहिए.”
एसोसिएशन ने कहा, “छात्र संघ को बहाल करने और चुनाव कराने की छात्रों की मांग पर गंभीरता से और सकारात्मक तरीके से विचार किया जाना चाहिए. ये युवा देश का भविष्य हैं. विश्वविद्यालयों को लोकतांत्रिक भागीदारी, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देना चाहिए, न कि छात्रों की जायज मांगों को विवादों के पीछे दबने देना चाहिए. जब लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए छात्रों की चिंताओं का समाधान किया जा सकता है, तो उन्हें एक निर्वाचित प्रतिनिधि निकाय से वंचित क्यों रखा जाए.”
एसोसिएशन ने कहा, “छात्र बस एक निर्वाचित छात्र संघ के अपने लोकतांत्रिक अधिकार की मांग कर रहे हैं. इन जायज मांगों को पूरा करने के बजाय, Union Minister गिरिराज सिंह जैसे नेता इस घटना का इस्तेमाल लोगों का ध्यान भटकाने, छात्र समुदाय को बदनाम करने और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए उनके शांतिपूर्ण संघर्ष को अमान्य ठहराने के लिए कर रहे हैं.”
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ओपी/पीएम


