जापान ने जी-20 देशों से की तेल भंडार बढ़ाने की अपील

अटलांटा, 31 अक्टूबर . मध्य पूर्व संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच जापान ने जी-20 देशों से अपने तेल भंडारण को मजबूत करने और ऊर्जा व्यापार को स्वतंत्र एवं पारदर्शी बनाए रखने की अपील की है.
जापान ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए खाड़ी देशों के साथ व्यापक आर्थिक और ऊर्जा सहयोग योजना तैयार करने की भी जानकारी दी है.
विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने Friday को अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ऊर्जा और आर्थिक विकास पर हुए सत्र में ये प्रस्ताव रखे.
जापान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय और ऊर्जा उत्पादक तथा उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई.
बैठक में मध्य पूर्व के घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में पैदा हुए मौजूदा ऊर्जा संकट और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
मोतेगी ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं सामने रखीं. इनमें ऊर्जा व्यापार को स्वतंत्र और पारदर्शी बनाए रखना, अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए तेल भंडार को मजबूत करना तथा ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग बढ़ाना शामिल है.
उन्होंने कहा कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और ऊर्जा खपत में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले जी-20 देशों की इस संकट से निपटने में साझा जिम्मेदारी है. ऐसे में सदस्य देशों के बीच करीबी समन्वय जरूरी है.
जापान ने इस दौरान खाड़ी देशों के साथ एक व्यापक सहयोग योजना तैयार करने की जानकारी भी दी. इसका उद्देश्य इन देशों की आर्थिक और ऊर्जा संबंधी मजबूती बढ़ाना है. हालांकि, जापान की ओर से जारी जानकारी में इस योजना की समयसीमा, वित्तीय आवंटन या इसमें शामिल होने वाले देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया.
मोतेगी के मुताबिक, यह योजना मध्य पूर्व के तेल उत्पादक देशों और एशियाई उपभोक्ता देशों के बीच संपर्क और सहयोग मजबूत करने की जापान की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. जापान ऊर्जा आपूर्ति, भंडारण और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग के जरिए इस संबंध को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है.
जापानी विदेश मंत्री ने एशिया में तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए पहले से जारी प्रयासों का भी उल्लेख किया. उन्होंने मध्य पूर्व के देशों में समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्रों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के द्रवीकरण संयंत्रों के निर्माण में जापान की वित्तीय और तकनीकी भागीदारी का हवाला दिया.
उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों को और व्यापक बनाने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.
मोतेगी ने जापान की मौजूदा ‘पॉवर एशिया’ पहल को भी ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता से निपटने की रणनीति का अहम हिस्सा बताया. इस पहल के तहत तत्काल ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, मध्यम और दीर्घकालिक अवधि में क्षेत्रीय तेल भंडारण व्यवस्था मजबूत करने तथा ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर काम किया जा रहा है.
जापान के अनुसार, एशियाई देश ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता से विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में इस पहल के जरिए तात्कालिक जरूरतों के साथ-साथ भविष्य के लिए मजबूत ऊर्जा भंडारण व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
हालांकि, जापान की ओर से जारी जानकारी में India के लिए किसी नए ऊर्जा आवंटन या विशेष परियोजना की घोषणा नहीं की गई है.
गौरतलब है कि जापान ने ‘पॉवर एशिया’ पहल की शुरुआत इसी साल अप्रैल में की थी. अटलांटा की बैठक में मोतेगी ने इस पहल के तहत आगे बढ़ाए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया. यह किसी नई योजना की शुरुआत नहीं, बल्कि पहले से जारी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता थी.
मोतेगी ने सभी जी-20 सदस्य देशों से स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने का आग्रह किया और कहा कि जापान इस दिशा में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने जी-20 को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच बताते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर सदस्य देशों को एक साथ लाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. बैठक के दूसरे सत्र में रखे गए जापान के प्रस्तावों में तत्काल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भंडारण, विविधीकरण और उत्पादक-उपभोक्ता देशों के बीच साझेदारी को प्रमुखता दी गई.
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केआर/


