जयपुर में व्यापारी के अपहरण मामले का मास्टरमाइंड दुबई में गिरफ्तार, जयपुर लाया गया

jaipur, 4 सितंबर . jaipur के व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता के अपहरण के कथित मास्टरमाइंड करण असवानी उर्फ ​​कमल सिंधी को Dubai में गिरफ्तार करने के बाद Rajasthan Police उसे jaipur ले आई है. Police ने Friday को बताया कि व्यापारी के अपहरण और परिवार से फिरौती की मांग करने के बाद वह India से भाग गया था और लगभग एक वर्ष बाद उसे वापस लाया गया है.

बिजनेसमैन नरेंद्र नाथ दत्ता के अपहरण के मुख्य आरोपी अश्वनी को Rajasthan एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ), इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मिली-जुली कोशिशों से यूएई में ढूंढा गया. उसे India लाने से पहले अबू धाबी इंटरपोल यूनिट ने हिरासत में लिया और Thursday देर रात jaipur लाया गया.

यह ऑपरेशन Police के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एटीएस, एएनटीएफ और एजीटीएफ) ​​दिनेश एमएन की देखरेख में चलाया गया. इसकी निगरानी डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल योगेश यादव और एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ Police सिद्धांत शर्मा ने की. डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ Police (डीएसपी) रवींद्र प्रताप और Police इंस्पेक्टर (एसआई) सुनील जांगिड़ और राम सिंह नथावत ने अपनी टीमों के साथ आरोपी का पता लगाने, उसके क्रिमिनल नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने और संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बैठाने में अहम भूमिका निभाई.

दरअसल, 21 अगस्त 2025 को खोह नागोरियन Police स्टेशन में First Information Report दर्ज की गई थी. शिकायत के अनुसार, बिजनेसमैन नरेंद्र नाथ दत्ता 20 अगस्त 2025 को jaipur स्थित अपने घर से वैशाली नगर के लिए निकले थे. उनके साथ एक परिचित और एक ड्राइवर भी थे. जब बाद में उनके परिवार को पता चला कि उनका मोबाइल फोन बंद है, तो वे परेशान हो गए. अगले दिन परिवार को दत्ता के मोबाइल फोन से एक कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उनका अपहरण कर लिया गया है और उनकी रिहाई के लिए फिरौती की मांग की गई.

तुरंत कार्रवाई करते हुए Police ने जांच शुरू की और नरेंद्र नाथ दत्ता और उनके ड्राइवर योगेश को सफलतापूर्वक छुड़ा लिया. जांच के दौरान Police ने हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ ​​शाका को गिरफ्तार किया.

मामले की जांच से पता चला कि आरोपियों ने Police की वर्दी पहनी थी और नरेंद्र नाथ दत्ता व अन्य लोगों के अपहरण की साजिश रची थी. पीड़ितों को आगरा समेत अलग-अलग जगहों पर बंधक बनाकर रखा गया था और उनके परिवारों से फिरौती की मांग की गई थी. पीड़ित की कार भी हर्ष गौतम के पास से बरामद की गई.

Police ने अपराध में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त किया. आगे की जांच में पता चला कि पीड़ितों को आगरा और अन्य जगहों पर कैसे बंधक बनाकर रखा गया था. जब इस मामले में करण अश्वनी की भूमिका सामने आई तो Police टीमों ने उसके संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी ली. हालांकि वह फरार हो गया.

जांच से यह भी पता चला कि उसके संबंध एक संगठित अपराध गिरोह से थे और अपहरण व फिरौती के मामले में उसके साथियों के खिलाफ सबूत भी जांच के दौरान मिले. इसके बाद Police ने अदालत से अश्वनी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल किया. हालांकि, जब उसकी तलाश तेज हुई तो जांचकर्ताओं को पता चला कि वह पहले ही देश से भाग चुका था.

उसके Dubai भागने की जानकारी मिलने के बाद एजीटीएफ ने जांच का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा दिया. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया और टीम ने संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखा. एजीटीएफ ने अबू धाबी में इंटरपोल यूनिट के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा और आरोपी से जुड़ी अहम जानकारी साझा की. तकनीकी निगरानी और जांच के अन्य तरीकों का इस्तेमाल करते हुए टीम ने उसकी लोकेशन का पता लगाया और यह जानकारी अबू धाबी इंटरपोल टीम को दी. इसके बाद अबू धाबी इंटरपोल अधिकारियों ने आरोपी को हिरासत में ले लिया.

वहीं, अतिरिक्त Police अधीक्षक सिद्धार्थ शर्मा के नेतृत्व में Rajasthan Police की एक टीम 31 अगस्त को jaipur से Dubai के लिए रवाना हुई. जरूरी कानूनी और समन्वय संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, टीम ने करण अश्वनी को अपनी कस्टडी में लिया और Thursday देर रात उसे jaipur वापस ले आई. उसके jaipur लौटने के साथ ही वह आरोपी, जो अपहरण के मामले के बाद विदेश भाग गया था, अब Rajasthan Police की कस्टडी में है.

डीके/वीसी

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