
श्रीनगर, 6 अक्टूबर . जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने Tuesday को रोहिंग्याओं के खिलाफ हालिया प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें बिना किसी वजह के निशाना बनाया जा रहा है.
सीएम उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जो लोग बिना इजाजत बांग्लादेश से आए हैं, उनका मामला अलग है, लेकिन रोहिंग्या, जिन्हें बिना किसी वजह के निशाना बनाया जा रहा है, जब उन्हें उनके देश से निकाला गया था तो हमने उन्हें यहां जगह दी थी.”
उन्होंने आगे कहा, “हमने उन्हें (रोहिंग्या) तब तक यहां रहने की इजाजत दी थी जब तक उनके देश के हालात बेहतर न हो जाएं. मुझे अचानक उनके खिलाफ कार्रवाई करना अजीब लगता है, लेकिन यह हमारे हाथ में नहीं है. यह India Government का मामला है.”
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे 250 बांग्लादेशी नागरिकों को Monday को आईएएफ की फ्लाइट से पश्चिम बंगाल ले जाया गया, ताकि उन्हें बांग्लादेश वापस भेजा जा सके.
Chief Minister ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर कहा कि जम्मू-कश्मीर Government इसे लागू नहीं करेगी.
उन्होंने आगे कहा, “ऐसे कानून (यूसीसी) पर संसद में बहस होनी चाहिए और इसे संसद द्वारा ही बनाया जाना चाहिए. अगर हिम्मत है तो संसद में कानून लाएं. संसद में इस पर बहस करें. देखें कि यह संसद में पास होता है या नहीं.”
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक ऐसा प्रस्ताव है, जिसके तहत सभी नागरिकों के लिए एक ही तरह के पर्सनल लॉ (निजी कानून) होंगे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो.
यूसीसी शादी, तलाक, गोद लेने, विरासत और उत्तराधिकार से जुड़े धर्म-आधारित अलग-अलग नियमों की जगह लेगा.
अभी, अलग-अलग धार्मिक समुदाय अपने-अपने अलग पर्सनल लॉ का पालन करते हैं जो धर्मग्रंथों और रीति-रिवाजों पर आधारित होते हैं.
भारतीय संविधान के आर्टिकल 44 में यूसीसी का जिक्र ‘राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत’ के तौर पर किया गया है, जिसका मतलब है कि यह राज्य की नीति के लिए मार्गदर्शन तो करता है, लेकिन इसे अदालतों के जरिए कानूनी रूप से लागू नहीं कराया जा सकता.
यूसीसी के समर्थक कहते हैं कि यह भेदभावपूर्ण परंपराओं को खत्म करके जेंडर जस्टिस (लैंगिक न्याय), कानून के सामने समानता, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है.
आलोचक सांस्कृतिक विविधता, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हैं.
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एससीएच/डीकेपी