जम्मू-कश्मीर: डोडा में गाय के गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बना रही गोवर्धन यूनिट, लाभार्थी बोला-यह स्कीम गांव के लिए उपहार

डोडा, 8 सितंबर . जम्मू-कश्मीर के डोडा में गोवर्धन यूनिट की ओर से गाय के गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा रही है. इससे ग्रामीण स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल पेश किया गया है. इसको लेकर एसीडी मोहम्मद अफाकी और लाभार्थी की प्रतिक्रिया सामने आई है.

से बातचीत करते हुए लाभार्थी ने कहा कि बायोगैस प्लांट Government की स्कीम है; यह हमारे गांव के लिए गिफ्ट है. Government की ओर से 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है. यह हमारे लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है कि हमको खाना बनाने के लिए लड़की की जरूरत नहीं है. सुबह हर घर से दो-दो तसले गोबर डाले जाते हैं. पूरे दिन गैस जलाया जाता है. हमारे गांव के लिए खुशी की बात है. हमने कभी सोचा नहीं था कि फ्री में घर बैठे-बैठे गैस मिल जाएगी.

लाभार्थी ने कहा कि इस प्लांट की क्षमता 25-30 घरों की है. ट्रायल के तौर पर हम 15 घरों में यूज किया जा रहा है. अगर हम तीन टाइम गोबर डालेंगे तो 30 से 35 घर भी चला सकते हैं. जितना गोबर होगा उसी अनुसार यह गैस बनेगी. बाहर के देशों के बीच युद्ध होने से लोगों को गैस की परेशानी होने लगी, लेकिन हमको इसकी कोई परेशानी हुई है. हम लोग कहते हैं कि हमारी गाय कितनी घास खाएगी और गोबर कितनी देगी, जिसको गैस प्लांट में डाला जाएगा. आगे हमारी ओर से इस काम को और गति दी जाएगी, जिससे कि जरूरत पड़ने पर 24 घंटे गैस की मिल सके.

लाभार्थी की ओर से कहा गया, एक तरफ से हम प्लांट में गोबर डालते हैं, तो दूसरी कंपनियों का फोन आ रहा है कि इसकी वेस्टेज को खाद के लिए हम आपसे लेंगे, जिसकी कीमत 25 रुपए किलो दिया जाएगा. यही खाद खेतों में डाला जाए तो हमको बाहर से खाद लाने की जरूरत नहीं है. इससे कोई एक परिवार ही नहीं, बल्कि इससे पूरा एक गांव चल सकता है. आने वाले वक्त में इस पर जितना हम मेहनत करेंगे उतना ही फायदा है. बायोगैस प्लांट के हमने Madhya Pradesh में देखे हैं, जिस तरह से हम गैस को सिलेंडरों में भर रहे हैं. उस स्टेज पर पहुंच गए हैं. आने वाले वक्त में हमारी भी कोशिश यही रहेगी. दिल्ली और यहां कोई फर्क नहीं रहा.

एसीडी मोहम्मद अफाकी ने कहा कि मौजूदा वक्त में 15 घरों को कुकिंग गैस उपलब्ध कराई जा रही है. हमारा लगभग 40 लाख रुपए का बजट है, जो ट्रायल बेसिस पर है. हमारा यह प्रोजेक्ट सफल हो गया है. हमारी कोशिश है कि आने वाले वक्त में अलग ब्लॉकों में इस तरह के प्रोजेक्ट को बनाएं. हमारे ग्रामीण इलाकों में मवेशी बड़े तादात में हैं, जिससे बड़े पैमाने पर हमारे पास गोबर उपलब्ध होता है.

एसडी/पीएम

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