जमीनों के आसमान छूते दामों ने किसानों को भूमिहीन होने की कगार पर पहुंचाया: ओम प्रकाश धनखड़

झज्जर, 21 अक्टूबर . भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने किसान कल्याण को लेकर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि ए2+एफएल फॉर्मूले पर फसलों के दाम, फसल बीमा योजना और 14 फसलों की Governmentी खरीद जैसी पहल उनकी अगुवाई में शुरू हुईं, जो अब 24 फसलों तक विस्तार पा चुकी हैं और किसानों को सालाना 1200 करोड़ रुपए का मुआवजा मिल रहा है.
किसान कल्याण और कृषि सुधारों पर भाजपा नेता ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा, “मुझे उस समय जो जिम्मेदारी मिली, उस समय हम कुछ चीजें कर पाए. हम ए2+एफएल (खेती का नगद खर्च + परिवार के श्रम का मूल्य) के आधार पर किसानों को फसलों के दाम, Prime Minister के आशीर्वाद से दिला पाए. किसान के बेटे के नाते हमने उस मुद्दे को उठाया. वह पार्टी के घोषणापत्र में जुड़ा और हमारी Government आई तो उसका क्रियान्वयन भी हुआ. हम फसल बीमा कर पाए. आज 1200 करोड़ रुपए हर साल हमारे किसानों को मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि उस समय 14 फसलों की खरीद हम शुरू कर पाए और अब 24 फसलों की खरीद देरी स्कीम में हो रही है. हम कृषि क्षेत्र में 52 टर्मिनल बाजार शुरू कर पाए, जिससे हमारे सब्जी के किसानों को कोई कठिनाई न हो. उसका लाभ भी सब्जी के किसान उठा रहे हैं. 284 करोड़ रुपए का उन्हें मुआवजा मिल चुका है. बाजार में भी और खेत-खलिहान में भी किसानों को सुरक्षित करने का काम उस समय हमने किया. दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलीं.
ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि अब Prime Minister ने किसान सम्मान निधि से उनका मान और बढ़ाया, लेकिन हमारे इलाके के लिए एक नया चैलेंज उत्पन्न हुआ है, वह है जमीनों के ऊंचे भाव. जब जमीनों के ऊंचे भाव हैं और उनकी आमदनी कम हो जाती है, तो खेती व्यवहारिक नहीं रहती. जब वह व्यवहारिक नहीं रहती, तो किसान उसकी बिक्री कर देता है. इसी तरह अब मैं देख रहा हूं कि जब भी इलाके में जाता हूं, गांवों में घूमता हूं, कोई न कोई नई दीवारें खींची हुई होती है. मुझे अंदर से अच्छा नहीं लगता कि यह जमीन कहीं न कहीं हमारे किसान की चली गई.
उन्होंने कहा कि पहले तो हुड्डा साहब ने हमें भूमिहीन करने का काम किया. यह काम उन्होंने रोहतक में नहीं किया, झज्जर में भी नहीं किया. यहां के लोगों की 6000 एकड़ जमीन चली गई. अब यह आगे और भूमिहीन न हो जाएं, तो इसका उपाय क्या है? खेती को व्यवहारिक बनाना होगा. यह जो धान और गेहूं की खेती है, इतनी महंगी जमीन में व्यवहारिक नहीं रह सकती. इसके लिए हमें वह खेती करनी पड़ेगी जिसमें आमदनी सघन हो. इनकम सघन खेती करनी पड़ेगी. इनकम सघन खेती में पोल्ट्री भी है, फिशिंग भी है, फ्लोरीकल्चर भी है, फलों की खेती भी है. इसके लिए डायरेक्ट मार्केटिंग जरूरी है.
ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि हम इतने सौभाग्यशाली हैं कि हमारे पास दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम का बड़ा बाजार है. इस मार्केट का आकलन लगभग 300 से 400 करोड़ रुपए प्रतिदिन का है. इतना कम से कम लोग रोजाना खेती के उत्पादों का उपयोग करते हैं. मैं यह मानता हूं कि इस मार्केट के इतने पास होने से इस पर हमारा हक भी है और हमारी ड्यूटी भी बनती है कि हम शहरी लोगों को ताजा माल पहुंचाएं. अगर हम इस बाजार पर एक तरह से अपना अधिकार जमा लेते हैं तो हमारा किसान बहुत अच्छी आमदनी वाला हो जाएगा. वह भूमिहीन होने से बचेगा. हमारी जमीनें बचेंगी.
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केके/वीसी


