चीन के मैन्युफैक्चरिंग अपग्रेड से बढ़ेगी ग्लोबल डिमांड

बीजिंग, 22 सितंबर . जब हम चीन की मैन्युफैक्चरिंग की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां, बड़े पैमाने पर उत्पादन और दुनिया के बाजारों में पहुंचने वाले चीनी सामान की तस्वीर उभरती है. लेकिन, अब चीन की मैन्युफैक्चरिंग सिर्फ ज्यादा सामान बनाने तक सीमित नहीं है.

चीन अपनी फैक्ट्रियों को ज्यादा स्मार्ट, तकनीकी और आधुनिक बनाने पर तेजी से जोर दे रहा है. ऐसे में सवाल है कि इस बदलाव का दुनिया की मांग पर क्या असर पड़ेगा?

आंकड़े बताते हैं कि यह बदलाव सिर्फ दावों तक सीमित नहीं है. चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, 2025 में चीन के हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के उत्पादन में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसी दौरान उपकरण निर्माण क्षेत्र 9.2 प्रतिशत बढ़ा.

वहीं, बड़े औद्योगिक क्षेत्र में हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़कर 17.1 प्रतिशत हो गई यानी चीन की फैक्ट्रियों में अब पारंपरिक सामान के साथ-साथ ज्यादा तकनीकी और उच्च मूल्य वाले उत्पादों की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है.

अब इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. अगर कोई फैक्ट्री पहले सामान्य कार बनाती थी, लेकिन अब वही फैक्ट्री इलेक्ट्रिक कार, बेहतर बैटरी और स्मार्ट ड्राइविंग तकनीक वाली कार बनाने लगे, तो उसका बाजार भी बदल जाएगा. ऐसी तकनीक की जरूरत सिर्फ चीन में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी पैदा हो सकती है. यानी मैन्युफैक्चरिंग अपग्रेड सिर्फ सप्लाई बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह नई डिमांड पैदा करने का जरिया भी बन सकता है.

चीन के इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को ही देख लीजिए. 2025 में चीन में नई ऊर्जा वाहनों का उत्पादन करीब 1 करोड़ 65 लाख यूनिट रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 25.1 प्रतिशत ज्यादा है. इसी तरह औद्योगिक रोबोट का उत्पादन 28 प्रतिशत और थ्री-डी प्रिंटिंग उपकरण का उत्पादन 52.5 प्रतिशत बढ़ा.

ये आंकड़े बताते हैं कि चीन की नई मैन्युफैक्चरिंग तेजी से ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसी तकनीकों की ओर बढ़ रही है और यहीं से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है. जब किसी नए उत्पाद का उत्पादन बढ़ता है, तो सिर्फ उसी उत्पाद की मांग नहीं बढ़ती, बल्कि उससे जुड़े कई दूसरे उद्योगों के लिए भी बाजार तैयार होता है. इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ेगी तो बैटरी, चार्जिंग स्टेशन, बिजली उपकरण, सॉफ्टवेयर और दूसरे कल-पुर्जों की जरूरत भी बढ़ेगी. इसी तरह रोबोट का इस्तेमाल बढ़ेगा तो सेंसर, सॉफ्टवेयर, रखरखाव और ऑटोमेशन सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है.

इसके अलावा, तकनीक और बड़े पैमाने पर उत्पादन का एक फायदा कीमतों में भी दिखाई दे सकता है. अगर किसी नई तकनीक की उत्पादन लागत कम होती है, तो वह ज्यादा लोगों और ज्यादा देशों की पहुंच में आ सकती है. उदाहरण के लिए, सस्ती और बेहतर नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक ज्यादा देशों को स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकती है. इस तरह चीन का मैन्युफैक्चरिंग अपग्रेड दूसरे देशों में भी नई मांग और नए निवेश के अवसर पैदा कर सकता है.

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

एबीएम/

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