
New Delhi, 11 सितंबर . राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के उप-नेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि India दौरे के समय चीनी President शी जिनपिंग और Prime Minister Narendra Modi को सीमा विवाद पर ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने रूसी President व्लादिमीर पुतिन के India दौरे पर भी प्रतिक्रिया दी.
चीन के President शी जिनपिंग के प्रस्तावित India दौरे पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने समाचार एजेंसी से कहा, “पहले जब वे (चीन के President) आए थे तो उन्हें वे (पीएम मोदी) Ahmedabad ले गए थे और झूला झुलाया था. बदले में हमें गलवान घाटी में 21 जवानों की शहादत मिली थी. अब आ रहे हैं, तो Prime Minister मोदी को साहस दिखाना चाहिए और India की जनता को विश्वास में लेना चाहिए.”
कांग्रेस सांसद ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश में मानचित्र की गड़बड़ी हो, वहां जिस तरह गांव बसाए जा रहे हैं, या जिस तरीके से अरुणाचल प्रदेश को अपने हिस्से में दिखा रहे हैं, यही स्थिति लद्दाख के एक बड़े हिस्से की है. इस पर Prime Minister मोदी और चीन के President को ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए. वे India की जनता को यह विश्वास दिलाएं कि India की सार्वभौमिकता, एकता और अखंडता की ओर चीन कोई कुदृश्य नहीं दिखाएगा.”
रूसी President के India दौरे पर प्रमोद तिवारी ने कहा, “सोवियत रूस हमारा विश्वसनीय और सबसे पुराना दोस्त रहा है. पीएम मोदी के कार्यकाल में उसमें भटकाव हुआ. मेरा मानना यह है कि रूस के साथ हमें मजबूत संबंध रखना चाहिए. हमारी यह भी चिंता है कि ऑपरेशन सिंदूर में रूस का रुख India के पक्ष में नहीं था. यह सभी चीजें हमें स्पष्ट कर लेनी चाहिए. कुछ टुकड़ों में बात नहीं होनी चाहिए. India का हित ही सर्वोपरि हो. गले लगने और फोटो खिंचवाने से काम नहीं चल सकता है.”
वहीं, जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला के ‘वंदे मातरम’ वाले बयान पर प्रमोद तिवारी ने कहा, “कांग्रेस का अपना दृष्टिकोण है. 1937 में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सुझाव को स्वीकार किया था. देश भी उसे स्वीकार कर रहा है. उसी गीत को गाकर देश ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आजादी हासिल की.”
उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी की Governmentों, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की Governmentों और यहां तक कि अटल जी की Government ने भी इसी गीत को स्वीकार किया. पीएम मोदी ने खुद 12 साल तक इसे स्वीकार किया. अब, क्योंकि उनकी नाव डूब रही है और भाजपा के पास बात करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए उन्होंने एक मुद्दा उठाया है. मैं राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का Politicalरण करने के लिए भाजपा की निंदा करता हूं.”
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डीसीएच/