
Patna, 24 अगस्त . जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पूर्व राजदूत नवदीप सूरी को नोटिस, Jharkhand में देवेंद्र महतो ने ‘भर्ती सुधार यात्रा’ की घोषणा, चीनी की कीमतों को लेकर विरोध प्रदर्शन और बिहार Government ने पेपर लीक रोकने के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति बनाए जाने पर प्रतिक्रिया दी.
पेपर लीक को रोकने के लिए बिहार Government द्वारा पांच सदस्यीय पैनल बनाने पर जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, “यह ऐतिहासिक फैसला है. मेरा मानना है कि पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाने का राज्य Government का फैसला ऐतिहासिक है. सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए Government यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि लोगों को उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर लाभ मिले. यह फैसला उसी प्रतिबद्धता का नतीजा है. बिहार में पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ और परिश्रम के आधार पर लोगों को लाभ मिले, इसके लिए एनडीए की Government संकल्पित है.”
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सीतामढ़ी के दो दिवसीय दौरे को लेकर राजीव रंजन ने कहा, “उन्होंने सचमुच सबको हैरान कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उन्होंने कई अहम फैसले लिए हैं. जिस तरह से वे बिहार के अलग-अलग जिलों में सक्रिय हैं, चाहे प्राइमरी हेल्थ सेंटर हों, रेफरल अस्पताल हों, सब-डिविजनल अस्पताल हों या जिला अस्पताल, वे लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं. लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं और वे उन उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं.”
सुभासपा के चीनी की कीमतों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू करने पर राजीव रंजन ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि आम भारतीय के लिए यह मुश्किल समय है लेकिन एथेनॉल को लेकर जो कन्फ्यूजन पैदा हुआ है, उस पर बात करें तो आज एथेनॉल के लिए जरूरी तीन-चौथाई कच्चा माल मक्के की फसल से आता है. एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने पर निर्भरता अब बहुत कम हो गई है. ग्राहकों पर महंगाई का बोझ है, लेकिन यह दौर हमेशा नहीं रहेगा.”
पंजाब में एसआईआर के दौरान पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने नोटिस जारी किए जाने पर राजीव रंजन ने कहा, “एसआईआर आम और खास में कोई फर्क नहीं करता है. एसआईआर के निर्धारित मानदंड हैं. फार्मेट के अनुरूप संतोष जनक जवाब हासिल करना एसआईआर का मुख्य मकसद है. एसआईआर की प्रक्रिया से सभी को गुजरना पड़ेगा.”
Jharkhand में देवेंद्र महतो के ‘भर्ती सुधार यात्रा’ की घोषणा पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा, “Jharkhand में Government की ओर से भले ही सुलह हो गई हो, लेकिन आंदोलनकारियों का भरोसा अभी भी हेमंत सोरेन पर नहीं है.”
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