
गांधीनगर, 5 सितंबर . Saturday को शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में Gujarat भर के 40 शिक्षकों को शिक्षा और विद्यार्थियों के विकास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए ‘राज्य के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
Governor आचार्य देवव्रत और Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किए.
पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को उनके कार्यों के सम्मान में प्रशंसा पत्र और नकद पुरस्कार दिए गए.
पूर्व President और प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में 5 सितंबर को पूरे India में शिक्षक दिवस मनाया जाता है.
समारोह को संबोधित करते हुए Governor आचार्य देवव्रत ने शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और India की पारंपरिक संस्कृति में गुरु के महत्व को याद किया. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक मां बच्चे को जन्म देती है, उसी प्रकार एक गुरु अज्ञान को दूर करके और ज्ञान का मार्ग दिखाकर शिष्य का रूपांतरण करता है.
Governor ने मैकाले के शासनकाल में शुरू की गई शिक्षा प्रणाली के जोर की तुलना प्राचीन भारतीय शिक्षा के मूल्य-आधारित दृष्टिकोण से की.
उन्होंने कहा कि मानवता, करुणा, सेवा और माता-पिता एवं गुरुओं के प्रति श्रद्धा के बिना केवल भौतिक समृद्धि और व्यावसायिक ज्ञान से ही स्थायी सुख प्राप्त नहीं हो सकता.
उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से ही India ने खगोल विज्ञान और गणित सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
वर्तमान युग में तकनीकी और भौतिक ज्ञान के महत्व को स्वीकार करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैतिक मूल्य और आत्मज्ञान भी उतने ही आवश्यक हैं.
Governor ने “सा विद्या या विमुक्तये” का आह्वान किया, जिसका अर्थ है कि सच्चा ज्ञान व्यक्ति को मुक्ति दिलाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि मूल्यों के बिना शिक्षा सामाजिक अशांति और पतन का कारण बन सकती है.
देवव्रत ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन अपने नियमित पाठों से पहले कुछ मिनट निकालकर जीवन जीने की कला, देशभक्ति, मूल्यों और माता-पिता के प्रति सम्मान पर पाठ पढ़ाएं.
उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के विकास के लिए प्रौद्योगिकी और संस्कृति के बीच संतुलन आवश्यक है.
शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने पुरस्कार विजेताओं और उनके परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि सर्वश्रेष्ठ शिक्षक केवल बच्चों को शिक्षित ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ी को प्रेरित भी करते हैं.
वाजा ने कहा कि बच्चों में मूल्यों, गुणवत्ता, कौशल और जिज्ञासा विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
उन्होंने पुरस्कार समारोह को ज्ञान को सम्मानित करने का प्रयास बताया और कहा कि ज्ञान का सम्मान करने वाला समाज ही प्रगति कर सकता है और एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकता है.
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और पूर्व President डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और मूल्यों को याद करते हुए वाजा ने कहा कि संसद और विधानसभाएं कानून बनाती हैं, लेकिन शिक्षकों ने कक्षाओं में देश के वास्तविक भविष्य को आकार दिया है.
उन्होंने कहा कि Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में Gujarat Government दूरदराज के गांवों में भी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधाएं प्रदान करने के लिए काम कर रही है.
उन्होंने शिक्षा जगत से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और बच्चों को सक्षम, संवेदनशील और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने में मदद करने का आग्रह किया.
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एमएस/