गुजरात: अस्पतालों में मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 18 नई मशीनों को मंजूरी

गांधीनगर, 15 अक्टूबर . मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए Gujarat के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 18 अत्याधुनिक ‘फैकोइमल्सीफिकेशन’ मशीनों की मंजूरी दी. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री की ओर से मंजूरी मिलने के बाद Governmentी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को लगभग 8.85 करोड़ रुपये से अधिक की मशीनें मिलेंगी.
ये मशीनें Ahmedabad, सूरत, भावनगर, वडोदरा, जामनगर, मोरबी, गांधीनगर, वडनगर और हिम्मतनगर के Governmentी स्वास्थ्य संस्थानों में बांटी जाएंगी. राज्य Government ने कहा कि इन उपकरणों की मदद से मरीजों को आंखों का आधुनिक इलाज मुफ्त में मिल सकेगा.
Ahmedabad के ‘एमएंडजे इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी’ को सात मशीनें मिलेंगी जबकि भावनगर के Governmentी मेडिकल कॉलेज और मोरबी के जीएमआआरएस अस्पताल को दो-दो मशीनें दी जाएंगी. सूरत के न्यू सिविल अस्पताल और ओल्ड सिविल अस्पताल, जामनगर के जीजी जनरल अस्पताल, वडोदरा के ईएसआईसी जनरल अस्पताल और गांधीनगर, वडनगर तथा हिम्मतनगर के जीएमईआरएस संस्थानों में से प्रत्येक को एक-एक मशीन दी गई हैं.
इन मशीनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मोतियाबिंद की सर्जरी के दौरान सर्जन अल्ट्रासाउंड एनर्जी, वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो (तरल के बहाव) को नियंत्रित कर सकें, जिससे सर्जरी अधिक सटीक हो सके. इनकी तकनीक मोतियाबिंद के टुकड़ों को तोड़ने और उन्हें बाहर निकालने में मदद करती है. इससे सर्जरी के दौरान सर्जन का नियंत्रण बेहतर होता है और मरीज जल्दी ठीक हो पाता है.
इन उपकरणों के हैंडपीस में ‘एलिप्टिकल मूवमेंट’ (अंडाकार गति) तकनीक और फ्लूइड फ्लो तथा वैक्यूम को नियंत्रित करने के लिए ‘पेरिस्टाल्टिक पंप’ सिस्टम लगा है. इससे मोतियाबिंद के कणों को एक सक्शन टिप के जरिए बाहर निकाला जा सकता है. इसमें एक फुट-पेडल कंट्रोल सिस्टम भी है, जिसकी मदद से सर्जन हर ऑपरेशन की जरूरत के हिसाब से अल्ट्रासाउंड एनर्जी, वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो को एडजस्ट कर सकते हैं.
इन मशीनों में सीएएसई (चैंबर स्टेबिलाइजेशन एनवायरनमेंट) तकनीक भी शामिल है. यह तकनीक सर्जरी के दौरान आंख के अंदर वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करती है, जिससे आंख के भीतर दबाव स्थिर रहता है. इससे अचानक दबाव कम होने का खतरा (जिसे ‘पोस्ट-ऑक्लूजन सर्ज’ कहा जाता है) भी कम हो जाता है.
इसके हैंडपीस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सर्जरी के दौरान जहां छोटा चीरा लगाया जाता है, वहां बहुत अधिक गर्मी पैदा न हो. इससे कॉर्निया में सूजन (कॉर्नियल एडिमा) और सर्जरी के बाद होने वाली अन्य जटिलताओं को कम करने में मदद मिलती है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो सकता है.
राज्य Government Governmentी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आंखों की देखभाल की सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. इसके तहत, पानशेरिया की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इन मशीनों को मंजूरी दी गई.
–
एसडी/पीएम


