खाद से लेकर खाद्य पदार्थों तक की कीमतों में तेजी, कारोबारियों और ग्राहकों की सरकार से महंगाई कम करने की अपील

पिंपरी-चिंचवड़, 25 अगस्‍त . खाद से लेकर खाद्य पदार्थों तक की कीमतों में तेजी आ गई है. प्याज और चीनी के दाम बढ़ गए हैं, जिससे घरों के बजट पर दबाव बढ़ गया है. इस पर कारोबारियों, खरीदारों समेत किसानों ने Government से महंगाई कम करने की अपील की है.

प्याज विक्रेता फिरोज तंबोली ने कहा कि कम स्टॉक और कम आवक की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं. ग्राहक गजानन मोहिते ने बढ़ती कीमतों का ग्राहकों पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया.

प्याज विक्रेता फिरोज तंबोली ने से बातचीत के दौरान कहा, “इस साल बाजार में माल की सप्लाई 40 प्रतिशत कम हो गई है. पिछले साल प्याज की कीमत लगभग 20 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम थी. इस साल, सप्लाई में 40 प्रतिशत की कमी के कारण प्याज की कीमतें 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं. इसके अलावा, डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ाया है. किसानों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी लगभग 40 प्रतिशत फसल खराब हो गई है, जिससे बाजार में कीमतें और बढ़ गई हैं.”

उन्‍होंने बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी माल के आवक की कमी की वजह से हुई है. Government को कारोबारियों के स्‍टॉक पर ध्‍यान देने की जरूरत है. इस समय कालाबाजारी करने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं.

ग्राहक गजानन ने बताया कि Government को इस पर ध्‍यान देना चाहिए. चीनी और प्‍याज की कालाबाजारी पर सख्‍त कार्रवाई करने की जरूरत है.

एक महिला ग्राहक ने कहा कि गरीब जो रोजाना करीब 400 रुपए कमाते हैं, उनके लिए परेशानी की बात है. प्‍याज और चीनी के दाम बढ़ने से जेब पर बड़ा बोझ पड़ रहा है. शक्‍कर जो कुछ दिन पहले 40-45 रुपए किलो बिक रही थी, वह आज के समय में 75-80 रुपए के करीब है. आम आदमी के लिए चाय पीना भी भारी पड़ रहा है. ऐसे में खाएंगे क्‍या और बचाएंगे क्‍या. Government को इस पर ध्‍यान देते हुए महंगाई को कम करने के ठोस उपाय करना चाहिए.

एक अन्‍य ग्राहक ने बताया कि महंगाई बढ़ने से आम जनता परेशान है. अब घर चलाना मुश्किल हो रहा है.

वहीं, मालेगांव बाजार में प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जो लगभग 2,500 रुपए से बढ़कर 3,500-3,800 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है. व्यापारियों का कहना है कि भारी बारिश से फसल को नुकसान और नई फसल में देरी की वजह से कीमतें बढ़ी हैं. किसान, जिन्हें पिछले साल कम कीमतों के कारण नुकसान उठाना पड़ा था, अब एक स्थिर मूल्य नीति की मांग कर रहे हैं, जबकि कीमतों में बढ़ोतरी से घरों के बजट पर दबाव बढ़ रहा है.

कारोबारी ने बताया कि Government को कीमतों को काबू में रखने के लिए कदम उठाना चाहिए. जो किसान अनाज पैदा कर रहा है, वही घर-परिवार चलाने में असमर्थ हो रहा है. मौसम खराब होने के चलते माल बेकार हो रहे हैं. एक अन्‍य किसान ने कहा कि आज खाद से लेकर खाद्य पदार्थों तक की कीमतों में तेजी आ गई है. किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है.

एएसएच/एबीएम

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