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Sunday, 18 October 2026
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केरल में एनएच-66 की खामियों की जांच होगी, रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी

केरल में एनएच 66 की खामियों की जांच होगी, रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी

केरल में एनएच-66 की खामियों की जांच होगी, रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी

तिरुवनंतपुरम, 16 अक्टूबर . लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने Friday को विधानसभा में बताया कि केरल Government राष्ट्रीय राजमार्ग 66 के निर्माण में कथित खामियों की जांच करेगी. उन्होंने बताया कि Government इसके निष्कर्ष केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के संज्ञान में लाएगी.

यह आश्वासन राजमार्ग के डिजाइन और निर्माण, विशेष रूप से ऊंचे तटबंधों और अंडरपास के उपयोग को लेकर उठाई गई चिंताओं के बीच आया है, जिनकी केरल के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आलोचना हो रही है.

विधायक जी. सुधाकरन द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव का उत्तर देते हुए बशीर ने कहा कि Government कथित खामियों की जांच करेगी और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे केंद्र को भेज देगी.

सुधाकरन ने मांग की थी कि अलाप्पुझा जिले में कलारकोड से थोट्टापल्ली स्पिलवे के उत्तरी किनारे तक के 16 किलोमीटर के खंड को एक सतत एलिवेटेड राजमार्ग में परिवर्तित किया जाए.

उन्होंने मौजूदा निर्माण में खामियों की समीक्षा की भी मांग की.

हालांकि, मंत्री ने कहा कि इस खंड को निरंतर एलिवेटेड राजमार्ग में बदलना इस स्तर पर मुश्किल होगा, क्योंकि अधिकांश काम पहले ही पूरा हो चुका है.

उन्होंने कहा कि इस तरह के बदलाव के लिए स्वीकृत डिजाइन में बड़े संशोधन, व्यापक पुनर्निर्माण और अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता होगी.

बशीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों का स्वामित्व, नियंत्रण और विकास केंद्र Government के पास है.

केरल में एनएच-66 की योजना, डिजाइन, निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की है.

उन्होंने कहा कि एलिवेटेड हाईवे, फ्लाईओवर, अंडरपास, तटबंध और रिटेनिंग स्ट्रक्चर में से किसी एक का चुनाव इंजीनियरिंग आवश्यकताओं, यातायात की स्थिति और तकनीकी एवं वित्तीय व्यवहार्यता पर निर्भर करता है.

एलिवेटेड हाईवे में पाइल्स, पिलर और सुपरस्ट्रक्चर की आवश्यकता के कारण लागत भी अधिक होती है.

सुधाकरन ने तर्क दिया कि एनएच-66 के डिजाइन में केरल की उच्च जनसंख्या घनत्व और मार्ग में स्थित बड़ी संख्या में कस्बों को अधिक ध्यान में रखा जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर दीवारों जैसी दिखने वाली ऊंची सड़कों और सुरंगों जैसी दिखने वाली अंडरपास के निर्माण से निवासियों में चिंता पैदा हुई है.

मंत्री ने मौजूदा संरचनाओं के पुनर्रचना के संबंध में तत्काल कोई आश्वासन नहीं दिया.

इसके बजाय, प्रस्तावित जांच और उसके निष्कर्षों को केंद्र को सौंपने से निर्माण संबंधी कथित खामियों पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

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एमएस/

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